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Sunday, August 31, 2025

पंजाब: भाजपा ने ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाई

Newsपंजाब: भाजपा ने ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाई

चंडीगढ़, दो जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई ने उस सोशल मीडिया पोस्ट को हटा दिया है जिसमें उसने जून 1984 में स्वर्ण मंदिर से सशस्त्र आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए सेना के ऑपरेशन के दौरान ‘‘शहीद’’ हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी थी।

यह पोस्ट रविवार को ‘एक्स’ पर साझा की गई थी लेकिन बाद में बिना कारण बताए इसे हटा दिया गया।

पोस्ट में, भाजपा की पंजाब इकाई ने ‘‘स्वर्ण मंदिर पर हमले’’ को लेकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार की निंदा की थी और जान गंवाने वालों के परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की थी।

पोस्ट (जिसे हटा दिया गया है) में कहा गया था, ‘‘एक जून 1984? ‘साका नीला तारा’। कांग्रेस सरकार द्वारा दरबार साहिब पर किए गए हमले के पहले दिन के सभी शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि।’’

भाजपा ने अकाल तख्त को हुए नुकसान की तस्वीरें साझा की थीं और एक बख्तरबंद वाहन की भी तस्वीर डाली जिसके टायर पंक्चर थे।

इस पोस्ट को फेसबुक पर भी साझा किया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद हटा दिया गया।

इस बीच, अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने सिख समुदाय से जून के पहले सप्ताह को ‘‘पंथिक एकता की भावना के साथ मनाने और शहीदों को सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि देने’’ की अपील की है।

जून के पहले सप्ताह को उन्होंने ‘शहीदी हफ्ता’ कहा।

गर्गज ने एक बयान में कहा, ‘‘जब संगत पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस को मनाने के लिए जून 1984 में इकट्ठा हुई थी तो तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने सचखंड श्री हरमंदर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर टैंक, तोपखाने और गोलियों से सैन्य हमला किया।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘सिख समुदाय जून 1984 के सैन्य हमले को कभी नहीं भूल सकता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हर साल जून का पहला सप्ताह ‘पंथ’ के लिए एक बहुत ही भावनात्मक और पवित्र समय होता है जब शहीदों को याद किया जाता है।’’

जत्थेदार ने आग्रह किया कि एक से छह जून तक सिखों द्वारा वैश्विक स्तर पर विशेष ‘गुरमत समागम’, पाठ और संगोष्ठियां आयोजित की जानी चाहिए।

उन्होंने सभी गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों को विशेष श्री अखंड पाठ साहिब का पाठ करने और इतिहासकारों और प्रचारकों को गुरुद्वारों में आमंत्रित करने का निर्देश दिया ताकि जून 1984 और नवंबर 1984 (सिख विरोधी दंगे) की घटनाओं के बारे में संगत को बताया जा सके।

भाषा खारी नरेश

नरेश

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