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Sunday, August 31, 2025

भारत में तेजी से बढ़ रहे विमानन क्षेत्र में वैश्विक कंपनियां निवेश करें: प्रधानमंत्री मोदी

Newsभारत में तेजी से बढ़ रहे विमानन क्षेत्र में वैश्विक कंपनियां निवेश करें: प्रधानमंत्री मोदी

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को वैश्विक कंपनियों को देश के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित नियामकीय ढांचे, अनुपालन में सुगमता और सरल कर ढांचे के साथ भारत का तेजी से बढ़ता विमानन क्षेत्र अग्रणी वैश्विक कंपनियों के लिए बेहतर निवेश अवसर प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री ने उभरते क्षेत्र रखरखाव और मरम्मत (एमआरओ) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत विमान रखरखाव के लिए वैश्विक केंद्र बनने के प्रयासों में तेजी ला रहा है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) की 81वीं वार्षिक आम बैठक और विश्व हवाई परिवहन शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएटीएस) के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 में भारत में 96 एमआरओ सुविधाएं थीं, जो अब बढ़कर 154 हो गई हैं। इसके अलावा स्वत: मंजूर मार्ग के तहत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कमी और कर को युक्तिसंगत बनाने के उपायों ने एमआरओ क्षेत्र को नई गति दी है।

मोदी ने यह भी कहा कि देश का लक्ष्य 2030 तक मरम्मत और रखरखाव क्षेत्र का आकार बढ़ाकर चार अरब डॉलर करने का है।

उन्होंने कहा, ‘‘नया भारतीय विमान अधिनियम वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों के अनुरूप है। इसके साथ एक सुव्यवस्थित नियामकीय ढांचा, अनुपालन में सुगमता और सरल कर व्यवस्था है। यह सब प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश अवसर का प्रदान करता है।’’

भारत में पिछली आईएटीए की सालाना आम बैठक 42 साल पहले 1983 में आयोजित की गई थी। इस बार की बैठक में 1,600 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं जिनमें शीर्ष वैश्विक विमानन उद्योग के प्रमुख, सरकारी अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधि शामिल हैं।

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प्रधानमंत्री ने पिछले चार दशक में देश में हुए परिवर्तनकारी बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आज का भारत पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास से भरा हुआ है।

उन्होंने वैश्विक विमानन परिवेश में भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘वैश्विक विमानन परिवेश में भारत न केवल एक विशाल बाजार है, बल्कि नीति, नेतृत्व, नवोन्मेष और समावेशी विकास का प्रतीक भी हैं।’’

मोदी ने कहा, ‘‘आज, भारत अंतरिक्ष-विमानन के क्षेत्र में एक वैश्विक अगुवा के रूप में उभर रहा है। नागर विमानन क्षेत्र ने पिछले एक दशक में ऐतिहासिक प्रगति देखी है, जिसे हर जगह स्वीकार किया जा रहा है।’’

प्रधानमंत्री ने भारत के विमानन क्षेत्र को आगे बढ़ाने वाले तीन बुनियादी स्तंभों का जिक्र किया। एक विशाल बाजार, जो केवल उपभोक्ताओं का समूह नहीं, बल्कि भारत के महत्वाकांक्षी समाज का प्रतिबिंब है, एक मजबूत जनसांख्यिकी और प्रतिभा, जहां युवा नवोन्मेषक कृत्रिम मेधा, रोबोटिक्स और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी सफलताएं हासिल कर रहे हैं और एक खुला तथा सहायक नीति परिवेश, जो औद्योगिक विकास को सक्षम बनाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन गया है।’’ मोदी ने उड़ान योजना की सफलता का उल्लेख किया और इसे भारतीय नागर विमानन इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पहल के तहत 1.5 करोड़ से अधिक यात्रियों को किफायती हवाई यात्रा का लाभ मिला है। इससे कई नागरिक पहली बार उड़ान भरने में सक्षम हुए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की एयरलाइंस लगातार दहाई अंक की वृद्धि हासिल कर रही हैं। सालाना 24 करोड़ यात्री उड़ान भर रहे हैं, जो दुनिया भर के ज्यादातर देशों की कुल आबादी से अधिक है। वर्ष 2030 तक यह संख्या 50 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है।

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मोदी ने यह भी कहा कि भारत में सालाना 35 लाख टन माल हवाई मार्ग से ले जाया जाता है और इस दशक के अंत तक यह मात्रा बढ़कर एक करोड़ टन हो जाने की पूरी संभावना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में देश में 74 हवाई अड्डे परिचालन में थे, जो अब बढ़कर 162 हो गये हैं। भारतीय विमानन कंपनियों ने 2,000 से अधिक नये विमानों के ऑर्डर दिये हैं, जो इस क्षेत्र में तेजी से विकास का संकेत है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत के हवाई अड्डों की वार्षिक क्षमता अब 50 करोड़ यात्रियों की है और (देश) प्रौद्योगिकी के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को बेहतरीन अनुभव में नये मानक स्थापित करने वाले कुछ देशों में से एक है।’’

उन्होंने टिकाऊ विमान ईंधन, हरित प्रौद्योगिकियों में निवेश और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में उठाये गये कदमों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा, दक्षता और सतत विकास को समान रूप से प्राथमिकता दी जा रही है।

मोदी ने कहा कि लगातार हो रहे सुधारों से भारत के विमानन क्षेत्र को गति मिल रही है। उन्होंने एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में विनिर्माण मिशन की घोषणा की गई है, जो औद्योगिक विकास पर भारत के जोर को और मजबूत करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल एक विमानन बाजार के रूप में नहीं बल्कि मूल्य-श्रृंखला के प्रमुख देश के रूप में देखा जाना चाहिए। डिजाइन से लेकर डिलिवरी तक, भारत वैश्विक विमानन आपूर्ति श्रृंखला का एक अभिन्न अंग बन रहा है।

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उन्होंन कहा कि भारत लगातार खुले आकाश और वैश्विक संपर्क का समर्थन करता है। भारत ने शिकॉगो सम्मेलन के सिद्धांतों समर्थन किया है और अधिक जुड़े और सुलभ विमानन नेटवर्क की वकालत की है।

विश्व हवाई परिवहन शिखर सम्मेलन विमानन उद्योग के सामने आने वाले प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसमें एयरलाइन उद्योग का अर्थशास्त्र, हवाई संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा, टिकाऊ विमानन ईंधन उत्पादन, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उपायों का वित्तपोषण और नवोन्मेष आदि शामिल हैं।

भाषा रमण अजय

अजय

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