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Saturday, August 30, 2025

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले, राजनयिकों ने आतंकवाद से निपटने के लिए अधिक सहयोग का आह्वान किया

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नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) रियो डी जेनेरियो में अगले महीने होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले, समूह के प्रमुख सदस्य देशों के राजनयिकों ने आतंकवाद से निपटने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित किया और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों और आकांक्षाओं को मुख्यधारा में लाने का आह्वान किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक शुल्क नीति के बीच राजदूतों ने अंतर-ब्रिक्स व्यापार के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग के विस्तार का भी समर्थन किया और आर्थिक मुद्दों पर गहन सहयोग की वकालत की।

वित्तीय समावेशन के तहत भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ या विकासशील देशों की समस्याओं के समाधान को बढ़ावा देने में समूह के अहम महत्व पर जोर दिया और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्रा के अधिक उपयोग की वकालत की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्राजील के इस शहर की यात्रा कर सकते हैं।

भारत के ब्रिक्स शेरपा और विदेश मंत्रालय (एमईए) में सचिव (आर्थिक संबंध) दम्मू रवि ने कहा, ‘‘ब्रिक्स को एकजुट होकर काम करना होगा और ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए समाधान खोजना होगा। इसके लिए प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत और भविष्य में उन मुद्दों पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।’’

रवि ने ‘ब्रिक्स’ को विकास मंच और भू-राजनीतिक शक्ति दोनों के रूप में आकार देने में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, ‘‘हम केवल भागीदार नहीं हैं – हम ब्रिक्स की राह की दिशा में योगदानकर्ता हैं।’’

वरिष्ठ राजनयिक ने जोर दिया कि भारत के सफल विकास मॉडल – विशेष रूप से गरीबी उन्मूलन, वित्तीय समावेशन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में – को ग्लोबल साउथ में व्यापक अनुप्रयोग के लिए आदर्श के रूप में देखा जाना चाहिए।

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रवि शुक्रवार शाम ‘‘रियो में ब्रिक्स: एक समावेशी और टिकाऊ विश्व व्यवस्था को आकार देना’ नामक सम्मेलन में बोल रहे थे।

सम्मेलन का आयोजन भारत में ब्राजील के दूतावास और वैश्विक मामलों पर केंद्रित एक प्रमुख थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स’(सीजीआईआई) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

रवि के अलावा, भारत में ब्राजील के राजदूत केनेथ फेलिक्स हैकिंस्की दा नोब्रेगा, भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव, इंडोनेशिया की राजदूत इना हग्निनिंग्ट्यास कृष्णमूर्ति और मिस्र के राजदूत कामेल जायद कामेल गलाल ने सम्मेलन में भाग लिया।

राजदूतों ने आतंकवाद से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच अधिक से अधिक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर एक स्वर में बात की।

उन्होंने आतंकवाद के प्रति समूह की प्रतिक्रिया की सराहना की और भारत में 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हमने कड़ी निंदा की। इससे पता चलता है कि ब्रिक्स प्रमुख मुद्दों पर एक स्वर में बोल सकता है।’’

ब्रिक्स, जिसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, का 2024 में विस्तार किया गया जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया। ब्रिक्स में 2025 में इंडोनेशिया भी शामिल हो गया।

सीजीआईआई के सीईओ मनीष चंद द्वारा संचालित इस सम्मेलन में रियो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में ‘ग्लोबल साउथ’ की चुनौतियों के लिए स्थायी समाधान को बढ़ावा देने में ब्रिक्स की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इस संदर्भ में, इंडोनेशिया की राजदूत कृष्णमूर्ति ने बहुपक्षीय संस्थाओं में ‘ग्लोबल साउथ’ के बेहतर प्रतिनिधित्व का आह्वान किया।

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उन्होंने कहा, ‘‘ अभी ‘ग्लोबल साउथ’ दुनिया की 85 प्रतिशत आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 39 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। फिर भी बहुपक्षीय संस्थाएं इस वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं। ’’

आगामी रियो शिखर सम्मेलन के लिए काहिरा के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए मिस्र के राजदूत ने “बहुपक्षीय प्रणाली को इस तरह से सुधारने और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया जो विकासशील देशों की उभरती गतिशीलता और बढ़ती भूमिका को प्रतिबिंबित करे।”

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश

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