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Friday, August 29, 2025

जम्मू कश्मीर: सत्तर वर्षीय पर्यटक से बलात्कार के आरोपी की जमानत याचिका खारिज

Newsजम्मू कश्मीर: सत्तर वर्षीय पर्यटक से बलात्कार के आरोपी की जमानत याचिका खारिज

श्रीनगर, 28 जून (भाषा) जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले की एक अदालत ने महाराष्ट्र की 70 वर्षीय एक पर्यटक से बलात्कार के आरोपी व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए समाज के नैतिक ताने-बाने पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि यह घटना समाज में व्याप्त ‘नैतिक पतन और विकृत मानसिकता’ का प्रतिबिंब है।

अनंतनाग के प्रधान सत्र न्यायाधीश ताहिर खुर्शीद रैना ने शुक्रवार को गणेशबल पहलगाम निवासी आरोपी जुबैर अहमद की जमानत याचिका खारिज कर दी।

कथित घटना दक्षिण कश्मीर जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम के एक होटल में हुई, जहां महिला अप्रैल में अपने परिवार के साथ रह रही थी।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ने होटल में 70 वर्षीय महिला के कमरे में उस समय अवैध रूप से प्रवेश किया, जब वह अकेली थी। पुलिस की जांच के अनुसार आरोपी ने उसका मुंह एक कंबल से बंद कर दिया और उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस के अनुसार इस दौरान महिला को चोटें आयीं और बाद में आरोपी खिड़की से भाग गया।

पुलिस जांच के अनुसार, यह हमला इतना क्रूर था कि पीड़िता बैठने और हिलने-डुलने में असमर्थ थी तथा कई दिनों तक दर्द में रही।

हालांकि, आरोपी ने अपने वकील के माध्यम से जमानत के लिए याचिका दायर की, जिसमें उसने पुलिस पर व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण गलत तरीके से उसे फंसाने और पक्षपात करने का आरोप लगाया। आरोपी ने यह भी दलील दी कि उसकी कोई पहचान परेड नहीं करायी गई थी तथा वह जांच में सहयोग कर रहा था।

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न्यायाधीश ने कहा कि जांच जारी है और केस डायरी फाइल (सीएफ) के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि एक बुजुर्ग महिला के साथ अत्यंत नृशंस तरीके से बलात्कार किया गया।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यही वह चीज़ है जो वह पहलगाम से अपने जीवनभर के लिए लेकर गई है, जहां वह कश्मीर की खूबसूरती का आनंद लेने आयी थी।’’

उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय राय, फोरेंसिक रिपोर्ट और पीड़िता का बयान प्रथम दृष्टया बलात्कार के आरोपों का समर्थन करते हैं तथा आरोपी द्वारा दी गई जमानत के आधार का खंडन करते हैं।

न्यायाधीश ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘मुझे याचिका में दिए गए किसी भी आधार और आरोपी के वकील द्वारा दी गई दलील में ऐसा कुछ भी नहीं लगता जो इस अदालत के न्यायिक विवेक को प्रभावित करता हो।’

भाषा

शुभम अमित

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