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Saturday, August 30, 2025

दादा के विषय में अनेक कहानियां सुनीं: गुरु दत्त की पोतियां

Newsदादा के विषय में अनेक कहानियां सुनीं: गुरु दत्त की पोतियां

(कोमल पंचमटिया)

मुंबई, सात जुलाई (भाषा) सिनेमा जगत में अमर कृतियों के निर्माता रहे दिवंगत अभिनेता-फिल्मकार गुरु दत्त की पोतियां करुणा और गौरी फिल्म उद्योग में काम कर रही हैं और कई निर्देशकों के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम कर चुकी हैं।

गौरी (37) ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हम कभी खुद को इस तरह पेश नहीं करते कि ‘क्या आप जानते हैं हम कौन हैं?’… और जब आखिर में लोगों को पता चलता है, तो उनकी प्रतिक्रिया बहुत बड़ी एवं खुशी से भरी होती है।”

करुणा (40) ने कहा, “मुझे लगता है कि उन्हें दी जाने वाली सबसे अच्छी श्रद्धांजलि यह होगी कि हम ऐसी फिल्में बनाएं जो लोगों से जुड़ें और उनमें कुछ भावनात्मक असर छोड़ें। हम उन्हें अपने काम के जरिए श्रद्धांजलि देना चाहते हैं।”

दोनों बहनों ने अपने दादा-दादी को कभी नहीं देखा।

गुरु दत्त का निधन वर्ष 1964 में मात्र 39 वर्ष की उम्र में हो गया था, जबकि गीता दत्त का निधन 1972 में 41 वर्ष की उम्र में हुआ। लेकिन उन्होंने अपने पिता, चाचा तरुण, दादा के भाई देवी दत्त और बुआ ललिता लाजमी से उनके बारे में अनेक कहानियां सुनी हैं।

गौरी ने कहा कि गुरु दत्त ने परिवार में दया की भावना और खासकर जानवरों के प्रति प्रेम की विरासत छोड़ी।

वे दोनों फिल्म निर्देशक बनने की इच्छा रखती हैं और गुरु दत्त के जीवन पर बायोपिक बनाने को लेकर संशय में हैं।

करुणा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं उनके बारे में निष्पक्ष रह पाऊंगी, क्योंकि आखिरकार वे मेरे दादा थे। किसी व्यक्ति पर अच्छी बायोपिक बनाने के लिए आपको उसके जीवन को तटस्थ भाव से देखना होता है। मैं इस प्रक्रिया का हिस्सा जरूर बनूंगी, लेकिन खुद से उनकी बायोपिक नहीं बनाऊंगी।”

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करुणा अनुराग कश्यप की ‘अग्ली’, ‘दैट गर्ल इन यलो बूट्स’ और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक रही हैं।

गौरी ने ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’, ‘टेनेट’ और ‘गर्ल्स विल बी गर्ल्स’ जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया है।

उन्होंने कहा कि वह अकसर अपनी पारिवारिक पहचान छिपाकर काम करती हैं और जब लोगों को पता चलता है, तो उनकी प्रतिक्रिया खुशी से भरी होती है।

गौरी ने कहा, “जो लोग दादाजी को जानते हैं, वे बहुत उत्सुक होते हैं और पूछते हैं कि वे कैसे थे, उनका जीवन कैसा था?”

गुरु दत्त की उनकी पसंदीदा फिल्म ‘कागज़ के फूल’ है, जबकि करुणा को अपने दादा की दो फिल्म ‘प्यासा’ और ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ हैं।

भाषा

राखी नेत्रपाल

नेत्रपाल

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