पणजी, 11 जुलाई (भाषा) वन अधिकार अधिनियम मुख्य रूप से आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए जाना जाता है, लेकिन इससे दूसरे समुदायों के लोग भी लाभान्वित हो रहे हैं। समाज के एक बड़े वर्ग को इस कानून से लाभ पहुंच रहा है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
तटीय राज्य में अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए राज्य नोडल अधिकारी अजय रामचंद्र गौड़े ने कहा कि उन्हें प्राप्त 10,136 दावों में से 4,000 से अधिक ‘अन्य वनवासियों’ (ओटीएफडी) द्वारा किए गए हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली गोवा सरकार ने घोषणा की है कि वह अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम के तहत दायर सभी भूमि दावों का 19 दिसंबर से पहले निपटारा कर देगी। इस कानून को वन अधिकार अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
गौड़े ने ‘पीटीआई- वीडियो’ सेवा से बातचीत में बताया कि अधिकतर दावे दक्षिण गोवा के कैनाकोना और धारबंदोरा तथा उत्तरी गोवा के सत्तारी तालुकाओं से प्राप्त हुए हैं।
सत्तारी में अब तक निपटाए गए 2,460 दावों में से केवल 46 अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के हैं, जबकि 2,414 दावे गैर-अनुसूचित जनजाति समूहों के लोगों द्वारा दायर किए गए हैं।
भाषा रंजन मनीषा
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