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Saturday, August 30, 2025

केरल में सत्तारूढ़ माकपा के युवा संगठन ने ‘पाद पूजा’ के विरोध में मार्च निकाला

Newsकेरल में सत्तारूढ़ माकपा के युवा संगठन ने 'पाद पूजा' के विरोध में मार्च निकाला

अलप्पुझा (केरल), जुलाई 14 (भाषा) डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को अलप्पुझा जिले के मावेलीकारा स्थित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध एक स्कूल में हाल में आयोजित ‘पाद पूजा’ के खिलाफ विरोध मार्च निकाला।

डीवाईएफआई सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का युवा संगठन है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह विवेकानंद विद्यापीठ में बच्चों से न केवल शिक्षकों के पैर धुलवाए गए, बल्कि कार्यक्रम में शामिल एक स्थानीय भाजपा नेता के भी पैर धुलवाए गए।

मार्च में शामिल होने वाले वामपंथी कार्यकर्ताओं में महिलाएं भी थीं और उन्होंने स्कूल से कुछ मीटर दूर पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को लांघने की कोशिश की।

उनकी पुलिसवालों के साथ हल्की-फुल्की हाथापाई भी हुई और स्कूल प्रबंधन तथा भाजपा नेता अनूप (जो कथित तौर पर इलाके के वार्ड सदस्य हैं) के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने भाजपा नेता से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की।

हालांकि, स्कूल प्रधानाचार्य आर शांताकुमार ने अनूप के ‘पाद पूजा’ कार्यक्रम में भाग लेने को उचित ठहराया।

उन्होंने कहा कि यह विशेष अनुष्ठान स्कूल में वर्षों से किया जाता रहा है और यह पहली बार है कि यह मुद्दा अब उठाया गया है।

प्रधानाचार्य ने बताया कि अनूप ने इस अनुष्ठान में भाजपा नेता के रूप में नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था।

उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा, ‘इतने वर्षों से यह अनुष्ठान बिना किसी समस्या के संपन्न होता रहा है। जिन लोगों ने विवाद पैदा किया, उन्हें बताना चाहिए कि इस बार विवाद क्यों पैदा हुआ है।’

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प्रधानाचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्था हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करती है और अन्य समुदायों के छात्र भी इसे स्वीकार करते हुए स्कूल में आते हैं।

यह विरोध प्रदर्शन राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा लोगों के एक वर्ग द्वारा की जाने वाली ‘गुरु पूजा’ की प्रथा का पुरजोर बचाव करने और सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी द्वारा इस पर आपत्ति जताए जाने के एक दिन बाद हुआ।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों के चरणों में पुष्प अर्पित करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। हालांकि मंत्री ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और उन पर राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एजेंडा लागू करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

मंत्री के अलावा, माकपा के राज्य सचिव एम वी गोविंदन और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव के सी वेणुगोपाल भी कई सीबीएसई स्कूलों में आयोजित अनुष्ठान और राज्यपाल की टिप्पणी के खिलाफ सामने आए।

खबरों में कहा गया है कि 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कासरगोड और मावेलीकारा में भारतीय विद्यानिकेतन प्रबंधन के तहत दो सीबीएसई स्कूलों में ‘पाद पूजा’ समारोह आयोजित किए गए थे।

मंत्री शिवनकुट्टी ने कहा कि शिक्षा विभाग के एक अधिकारी को स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘गुलाम मानसिकता को बढ़ावा देने वाली प्रथाएं किसी भी परिस्थिति में अस्वीकार्य हैं। शिक्षा से ज्ञान और आत्म-जागरूकता का संचार होना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि सामान्य शिक्षा विभाग को ऐसे किसी भी पाठ्यक्रम के तहत स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम और संबंधित नियमों का उल्लंघन करता है।

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सत्तारूढ़ माकपा की छात्र शाखा ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) और विपक्षी कांग्रेस के छात्र संगठन ‘केरल स्टूडेंट्स यूनियन’ (केएसयू) ने भी इस अनुष्ठान की निंदा की और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

भाषा

शुभम वैभव

वैभव

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