नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना के तहत विज्ञापन पर केवल दो प्रतिशत खर्च हुआ है, न कि 80 प्रतिशत जैसा कि पहले कुछ खबरों में दावा किया गया था।
महिला और बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर से पूछा गया कि क्या बीबीबीपी योजना का 80 प्रतिशत कोष विज्ञापनों पर खर्च किए गए? उन्होंने जवाब दिया ‘‘नहीं।’’
राज्यसभा को इस प्रश्न के लिखित उत्तर में ठाकुर ने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच योजना पर कुल 335.37 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिनमें से केवल 7.02 करोड़ रुपये ‘‘मीडिया प्रचार’’ पर खर्च किए गए, जो कुल खर्च का लगभग 2.09 प्रतिशत है।
ठाकुर के अनुसार, विज्ञापन और मीडिया प्रचार पर पूरा खर्च 2020-21 में ही हुआ, इसके बाद के वर्षों में इस मद के तहत कोई राशि खर्च नहीं की गई।
जनवरी 2015 में शुरू की गई बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश्य लिंगानुपात में सुधार और बालिका सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है। यह योजना जागरूकता अभियानों और जिला स्तर पर बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के माध्यम से सामाजिक सोच और व्यवहार में बदलाव लाने पर केंद्रित है।
आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में योजना के तहत सबसे अधिक 95.96 करोड़ रुपये खर्च हुए और इसके बाद 2023-24 में 88.63 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया।
भाषा मनीषा माधव
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