शिमला, 24 जुलाई (भाषा) हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बृहस्पतिवार को चेतावनी दी कि अगर नशे की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो अगले पांच सालों में हिमाचल प्रदेश ‘उड़ता पंजाब’ बन जाएगा। उन्होंने राज्य में ‘सरकारी पुनर्वास केंद्रों की कमी’ पर भी अपनी नाराजगी जताई।
शिमला में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के मामले 2012 में करीब 500 थे और अब 2023 में ये बढ़कर लगभग 2200 हो गए हैं, यानी 340 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। उन्होंने राज्य में नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त की।
राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा एक नये अत्याधुनिक नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘कुल्लू में ‘रेड क्रॉस’ द्वारा संचालित केवल एक पुनर्वास केंद्र है और हम सुन रहे हैं कि सिरमौर जिले में पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के लिए भूमि की पहचान की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा है।’’
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ उनके अभियान के नतीजे सामने आने लगे हैं और लोग जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो माता-पिता पहले अपने बच्चों द्वारा नशे के सेवन को अनदेखा करते थे और छिपाते थे, वे अब मुखर और सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि पंचायतों को भी इसमें शामिल किया गया है और लोग आगे आकर पुलिस को नशा तस्करों के बारे में सूचित कर रहे हैं।
भाषा यासिर रंजन
रंजन