नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष हमला करते हुए बुधवार को उन्हें ‘‘चाइना गुरू’’ करार दिया और आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने चीन पर अपनी जानकारी 2008 के बीजिंग ओलंपिक में भाग लेकर और चीनी राजदूत से ‘‘निजी ट्यूशन’’ लेकर हासिल की।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में ‘‘पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा’’ में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उन्होंने ‘‘चाइना गुरुओं’’ की तरह चीन की अपनी हालिया यात्रा के दौरान कोई गोपनीय बैठकें या समझौते नहीं किए। उन्होंने कहा कि अपनी चीन यात्रा के दौरान उन्होंने आतंकवाद, तनाव कम करने और व्यापार पर लगे प्रतिबंधों सहित आपसी हितों पर चर्चा की थी।
राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में विशेष आमंत्रित के तौर पर भाग लिया था।
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच सहयोग 1960 के दशक में शुरू हुआ था लेकिन पिछली सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
मंत्री ने कहा कि कुछ लोग चीन-पाकिस्तान संबंध की बात कर रहे हैं, जिनका आरोप है कि वह चीन के मामले में पर्याप्त काम नहीं कर रहे हैं, जबकि उन्होंने विदेश सेवा में 41 साल बिताए हैं और चीन में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय राजदूत हैं।
जयशंकर ने कहा, ‘‘कुछ चाइना-गुरु आजकल चीन पर ज्ञान बांटते हैं। एक साहब तो मेरे सामने ही बैठे हैं, जिन्हें चीन से इतना प्रेम था कि उन्होंने भारत और चीन के बीच ‘चिंडिया’ जैसा कोई सौदा कर डाला। चीन के लिए बहुत प्रेम है।’’
उन्होंने कहा ‘‘उनके अलावा, एक और ‘चीन गुरु’ हैं। चीन के मामले में मेरी ओर से कुछ कमियाँ रही होंगी, क्योंकि मुझे चीन ओलंपिक में जाकर चीनी ज्ञान नहीं मिला, क्योंकि मुझे आमंत्रित नहीं किया गया था और मैं कोई विशेष व्यक्ति नहीं था। कुछ लोगों को ओलंपिक में जाकर चीन का ज्ञान मिला। लेकिन, वे वहाँ किससे मिले? वे सिर्फ़ चीनियों से ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों से भी मिले।’’
जयशंकर ने ‘चिंडिया’ शब्द का संदर्भ कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा गढ़े गए एक मुहावरे को लेकर दिया, जिन्होंने कहा था, ‘‘चिंडिया अभी भी एक जीवंत विचार है।’’
विदेश मंत्री ने कहा ‘‘लेकिन, जब आप ओलंपिक कक्षाओं में जाते हैं, तो कुछ चीज़ें छूट जाती हैं और फिर चीनी राजदूत को घर बुलाकर उनसे निजी ट्यूशन लेनी पड़ती है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘ये ‘चाइना गुरू’ कहते हैं कि चीन और पाकिस्तान बहुत करीब आ गए हैं, जो हकीकत है। वे एक साथ इसलिए आ गए क्योंकि बीच में हमने पीओके को छोड़ दिया।’’
उन्होंने कहा ‘‘यह कह कर, कि वह चेतावनी दे रहे हैं… क्या आप इतिहास की कक्षा में सो रहे थे? यह सहयोग और रणनीतिक साझेदारी संप्रग शासन के दौरान बढ़ी, जब चीनी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया।’’
राष्ट्रीय सुरक्षा पर विपक्ष की बातों का ज़िक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछले 20 सालों में समुद्री क्षेत्र में भारत को सबसे बड़ा नुकसान श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन के कब्ज़े से हुआ, लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। ‘‘उल्टे यह कहा गया कि यह चिंता की बात नहीं है।’’
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, ‘‘चाइना गुरू हमें चीन पर उपदेश देते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि यह सब उनके ज़माने में हुआ था।’’
अपनी हालिया चीन यात्रा का ज़िक्र करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘‘चीन यात्रा के दौरान, मैंने जो कुछ भी किया और जिस पर चर्चा की, वह सार्वजनिक रूप से जाहिर थी। यह स्पष्ट था, मैंने आतंकवाद पर चर्चा की, मैंने तनाव कम करने पर चर्चा की और मैंने चीन द्वारा लगाए गए व्यापार प्रतिबंधों पर भी चर्चा की।’’
जयशंकर ने कहा ‘‘मैंने स्पष्ट कर दिया कि चीन के साथ संबंध केवल तीन परस्पर हितों – पारस्परिक हित, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक सम्मान – पर ही विकसित होंगे।’’
उन्होंने कहा ‘‘कुछ अन्य लोगों के विपरीत, मैंने कोई गुप्त बैठक नहीं की, मैंने कोई गुप्त सौदे नहीं किए। ऐसा केवल ‘ओलंपिक लोग’ ही करते हैं, केवल चाइना-गुरु ही ऐसी बातें करते हैं, सामान्य लोग नहीं।’’
विपक्ष ने जयशंकर पर चीन के बारे में पर्याप्त बात न करने और चीनी सेना द्वारा सीमा पर अतिक्रमण के बावजूद उसके प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है।
भाषा मनीषा माधव
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