कोलकाता, 30 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस द्वारा बुधवार को यहां प्रेस वार्ता में लाई गई सजनूर परवीन नाम की एक महिला ने आरोप लगाया कि उस पर बांग्लादेशी होने का झूठा आरोप लगाकर उसे एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, उसके बच्चे के साथ उसे भी प्रताड़ित किया गया और खुद को दिल्ली पुलिसकर्मी बताने वाले चार लोगों ने उससे जबरन वसूली की।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को एक वीडियो पोस्ट कर आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस ने एक ऐसे बच्चे को भी नहीं बख्शा जिसकी मातृभाषा बंगाली है।
ममता के इस पोस्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रताड़ित करने के आरोपों से इनकार किया था, जिसके कुछ दिन बाद सजनूर ने प्रेस वार्ता में ये आरोप लगाए।
परवीन ने आरोप लगाया, “दो पुरुषों व दो महिलाओं ने खुद को दिल्ली पुलिसकर्मी बताकर 25 जुलाई को हमारे घर पर छापा मारा, हमारे आधार कार्ड जांचे। वे मेरे पति को तलाश रहे थे, जो उस समय काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। उन्होंने हमें बांग्लादेशी कहा जबकि हम उन्हें लगातार पश्चिम बंगाल से होने के बारे में बताते रहे।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया, “वे अगले दिन फिर आए और हमें एक सुनसान जगह पर ले गए, जहां हमसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को कहा। मैंने उनसे कहा कि मैं मुसलमान हूं और मना कर दिया। उन्होंने मुझे थप्पड़ मारे और मेरे पेट में लात मारी। उन्होंने मेरे बच्चे को भी पीटा।”
राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के भाई और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद सौमेंदु अधिकारी ने तथ्यों को कथित तौर पर तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाते हुए दिल्ली के मंदिर मार्ग थाने में मुख्यमंत्री बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जबकि प्रेस वार्ता के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष परवीन और उनके परिवार के साथ कोलकाता के प्रगति मैदान थाने गए और दिल्ली पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
खुद को मालदा जिले के चंचल इलाके की मूल निवासी बताने वाली और प्रवासी के रूप में अपने परिवार के साथ दिल्ली में रह रही परवीन ने राष्ट्रीय राजधानी में कथित यातना का विवरण दिया।
परवीन ने यहां तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से कहा, “जब उन्होंने मेरे बच्चे की पिटाई की तो उसके कान से खून बहने लगा और हमें इलाज भी नहीं दिया गया।”
उन्होंने दावा किया, “दिल्ली पुलिस ने हमें बताया कि पश्चिम बंगाल के लोगों का मतलब बांग्लादेशियों से है। उन्होंने हमें रिहा करने से पहले 25,000 रुपये भी वसूले।”
महिला ने दिल्ली पुलिस पर जबरन कागजों पर हस्ताक्षर कराने, उसका मोबाइल फोन छीन लेने और उन्हें किसी से मिलने नहीं देने का भी आरोप लगाया।
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को ममता बनर्जी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को ‘‘मनगढ़ंत’’ और ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ करार दिया था।
वीडियो में आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय राजधानी में बांग्ला भाषी एक महिला और उसके बच्चे पर भाषा को लेकर हमला किया गया।
वहीं, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक सीसीटीवी फुटेज साझा की, जिसमें परवीन और उसके बच्चे को अकेले ही अपने घर से निकलते हुए देखा जा सकता है और वह बिलकुल सही सलामत चलते दिखते हैं।
शुभेंदु ने इस वीडियो के जरिये ममता के दावे का खंडन किया कि पुलिस ने उन्हें जबरन उठाया था।
अधिकारी ने ममता बनर्जी के ‘‘झूठ का पर्दाफाश’’ करने के अपने प्रयास में दावा किया कि उन्हें ‘‘विश्वसनीय स्रोतों’’ से पता चला कि परवीन ने तृणमूल समर्थक एक रिश्तेदार और एक पत्रकार के प्रभाव में अपनी कहानी गढ़ी।
परवीन ने इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह फुटेज का केवल एक हिस्सा है। हमें कहां ले जाया गया और वहां हमें किस तरह की यातनाएं झेलनी पड़ीं, वाला महत्वपूर्ण हिस्सा गायब है। संपादित वीडियो क्लिप में केवल दिल्ली स्थित हमारे घर पर मेरी वापसी दिखाई गई है।”
इन दावों के बाद तृणमूल और भाजपा के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया।
घोष ने कहा, “हमारी नेता ममता बनर्जी के विरोध जताने के बाद इन लोगों को चुप कराने की एक सुनियोजित कोशिश की जा रही है। जिस जगह महिला और उसके बच्चे को प्रताड़ित किया गया था, उसके वीडियो जारी नहीं किए गए। इसके बजाय, परिवार से जबरन वसूली की गई। उन्हें बताया गया कि बंगाल और बांग्लादेश एक ही जैसे हैं।”
मंत्री और कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम ने कहा कि महिला का बयान मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को सही साबित करता है।
हकीम ने कहा, “मुख्यमंत्री ने खुलकर बोलकर सही काम किया है। पीड़िता की आपबीती साबित करती है कि मुख्यमंत्री का दावा सच था।”
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, “तृणमूल कांग्रेस झूठ फैलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्हें दिल्ली पुलिस के खिलाफ मामला दर्ज करने दीजिए, फिर देखते हैं कि आगे क्या होता है।”
अधिकारी ने कहा, “ममता बनर्जी को अपने सत्यापित अकाउंट से गलत सूचना फैलाने की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी। पुलिस जल्द ही कार्रवाई करेगी।”
भाषा जितेंद्र नेत्रपाल
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