तिरुवनंतपुरम, दो अगस्त (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देना फिल्मों का दुरुपयोग कर सांप्रदायिक नफरत फैलाने के प्रयासों का समर्थन करने जैसा है।
विजयन ने सांस्कृतिक और फिल्म समुदाय से ऐसे कदमों का एकजुट होकर विरोध करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि यह ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’’ है कि एक ऐसी फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया जो केरल की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं का अपमान करती है और दुनिया के सामने उसे बदनाम करती है।
विजयन ने यहां केरल फिल्म नीति सम्मेलन का उद्घाटन करने से पहले कहा, ‘यह भारतीय सिनेमा की महान सांस्कृतिक विरासत का भी अपमान करता है और यह संदेश देता है कि कला का इस्तेमाल हमारे देश की धर्मनिरपेक्षता को नष्ट करने और उसकी जगह सांप्रदायिकता लाने के लिए किया जाना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि फिल्म समुदाय को केरल के ऐसे विकृत चित्रण के खिलाफ जागरूक होना होगा और इस तरह के कदमों पर रोक लगानी होगी।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को ‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म सम्मान देने के फैसले की भी तीखी आलोचना की थी।
फिल्म निर्माता सुदीप्तो सेन को उनकी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ छायांकन का पुरस्कार भी मिला।
यह फिल्म केरल में महिलाओं का जबरन धर्मांतरण और आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट द्वारा भर्ती किए जाने के चित्रण के कारण विवादों में घिर गई थी।
विजयन ने यह भी कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि केरल फिल्म उद्योग को वह मान्यता क्यों नहीं मिली जिसका वह हकदार है और उम्मीद है कि तिरुवनंतपुरम में विधानसभा परिसर के शंकरनारायणन थम्पी हॉल में आयोजित सम्मेलन में यह चर्चा का विषय होगा।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का आयोजन मलयालम सिनेमा के सर्वांगीण विकास के लिए एक व्यापक फिल्म नीति तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था, क्योंकि बदलते समय के साथ इसका आधुनिकीकरण और विस्तार करना अनिवार्य था।
भाषा
योगेश देवेंद्र
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