श्रीनगर, दो अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि ‘कश्मीर समस्या’ का समाधान हिंसा में नहीं, बल्कि शिक्षा में है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कश्मीर एक शिक्षित समाज है।
प्रधान ने यहां एसकेआईसीसी में नौ दिवसीय चिनार पुस्तक महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘कश्मीर समस्या का समाधान बंदूक या लाठियों में नहीं, बल्कि कलम में है। कश्मीरी समाज एक शिक्षित समाज है।’’
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2019 में केंद्र द्वारा अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निरस्त किये जाने के बाद, जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में कई चीजें पहली बार हो रही हैं। कई वर्षों के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं बहाल हुई हैं। गरीब और पिछड़े वर्गों के लिए कई सुविधाएं या कार्यक्रम, या विभिन्न कानून, जो पहले यहां लागू नहीं हो रहे थे, अब अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों को लाभान्वित कर रहे हैं।’’
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए प्रधान ने कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले, केंद्र शासित प्रदेश में कई वर्षों तक स्थानीय चुनाव नहीं हुए थे। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों का जमीनी स्तर पर प्रतिनिधित्व गायब था; अब धीरे-धीरे जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल हो रही है।’’
कश्मीर में सामान्य स्थिति लौटने पर जोर देते हुए प्रधान ने विश्वास व्यक्त किया कि घाटी में पर्यटन क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन हो रहा है, स्थानीय व्यवसाय प्रगति कर रहा है और जैसे-जैसे व्यवस्था आगे बढ़ेगी, लोगों के विकास से जम्मू-कश्मीर में समृद्धि आएगी।’’
प्रधान ने घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर में पुस्तकालय आंदोलन को बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) केंद्र शासित प्रदेश में विभिन्न केंद्रीय योजनाओं को लागू करेगा।
उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले वर्ष के चिनार महोत्सव तक जम्मू-कश्मीर की स्थानीय भाषाओं की विभिन्न पुस्तकों का देश की अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा।
भाषा
देवेंद्र माधव
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