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Saturday, August 30, 2025

बिहार मसौदा मतदाता सूची: कांग्रेस नेता का निर्वाचन आयोग पर राजग सरकार के निर्देश पर काम करने का आरोप

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पटना, चार अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर सोमवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि आयोग केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के ‘‘निर्देश पर काम’’ कर रहा है और बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के जरिये गरीबों और वंचित वर्गों को मताधिकार से वंचित रखने की कोशिश कर रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय में संचार प्रभारी एवं पार्टी सचिव प्रणव झा ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया, ‘‘यह सच है कि निर्वाचन आयोग ने केंद्र की भाजपा-नीत राजग सरकार के निर्देश पर बिहार में लाखों वास्तविक मतदाताओं, खासकर हाशिये पर पड़े समुदायों के लोगों के नाम जानबूझकर हटा दिए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने बिहार में मतदाता सूची का मसौदा तैयार करने के दौरान मतदाता पंजीकरण के लिए आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में मानने से संबंधित उच्चतम न्यायालय के सुझावों की स्पष्ट रूप से अनदेखी की।

उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण के लिए आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में मानने के उच्चतम न्यायालय के सुझावों को नकार दिया। वह मतदाता पंजीकरण के लिए आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में स्वीकार न करने का कोई ठोस जवाब या औचित्य भी नहीं दे पाया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह बिहार में सत्तारूढ़ दलों, विशेषकर भाजपा और जनता दल (यूनाइटेट) को लाभ पहुंचाने के लिए निर्वाचन आयोग की साजिश है।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी।

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार की जनता राज्य की भाजपा-जद(यू) गठबंधन सरकार को बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं से उनके संवैधानिक अधिकार छीनने के उनके प्रयास के लिए माफ नहीं करेगी। राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव में राजग को सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा।’’

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कांग्रेस नेता ने कहा कि बिहार की राजग सरकार और निर्वाचन आयोग राज्य के लोगों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार हैं।

झा ने दावा किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय के सुझावों के बावजूद, निर्वाचन आयोग अड़ा हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को न तो न्यायपालिका पर भरोसा है और न ही भारत के प्रधान न्यायाधीश पर। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों का चयन करने वाले तीन-सदस्यीय पैनल से सीजेआई (प्रधान न्यायाधीश) को हटा दिया।’’

भाषा

अमित सुरेश

सुरेश

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