नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) लोकसभा ने मंगलवार को ‘गोवा राज्य, सभा निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधित्व का पुन: समायोजन विधेयक, 2024’ विधेयक को पारित कर दिया जिसमें गोवा विधानसभा में एसटी समुदाय के लिए सीट आरक्षित करने का प्रावधान है।
सदन ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान की। इसे पिछले साल पांच अगस्त को निचले सदन में प्रस्तुत किया गया था और दिसंबर में संसद के शीतकालीन सत्र में इस पर चर्चा हुई थी।
एसआईआर के मुद्दे पर लोकसभा की बैठक सुबह एक बार स्थगित होने के बाद दो बजे शुरू हुई तो पीठासीन सभापति संध्या राय ने विधेयक को पारित करने के लिए प्रस्तुत करने के वास्ते कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का नाम पुकारा।
मेघवाल ने कहा कि इस विधेयक पर पहले सदन में चर्चा हो चुकी है और यह इसलिए आवश्यक है कि अनुच्छेद 332 में प्रावधान है कि राज्य में यदि अनुसूचित जनजाति (एसटी) की जनसंख्या है, लेकिन विधानसभा में इस समुदाय के लिए सीट आरक्षित नहीं है तो वहां एसटी के लिए सीट होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि गोवा विधानसभा में 40 सीट में अनुसूचित जाति के लिए एक सीट आरक्षित है, लेकिन एसटी की एक भी सीट नहीं है और इसलिए यह समुदाय राज्य विधानसभा में आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहा।
मेघवाल ने कहा कि इस लिहाज से गोवा में एसटी के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए सीटें पुन: समायोजित करने के उद्देश्य से कानून बनाना जरूरी है।
इसके बाद सभा ने शोर-शराबे के बीच ही कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान की।
मेघवाल के अनुसार दो दशक पहले गोवा में परिसीमन हुआ था और उस वक्त राज्य में अनुसूचित जनजातियों की कुल आबादी 566 थी। उन्होंने कहा कि गोवा में एक विधेयक पारित किया गया, जिसमें तीन नए समुदायों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया जिसके बाद एसटी की आबादी बढ़ गई।
उनका कहना था कि अब गोवा में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोगों की संख्या करीब डेढ़ लाख हो गई है और ऐसे में सीटों के पुन:समायोजन की जरूरत पड़ी है।
शोर-शराबे में कुछ ही मिनट के अंदर विधेयक पारित होने के बाद सदन की बैठक को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
भाषा वैभव माधव
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