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Saturday, August 30, 2025

संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं राहुल गांधी : उच्चतम न्यायालय की आलोचना के बाद भाजपा ने कहा

Newsसंवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं राहुल गांधी : उच्चतम न्यायालय की आलोचना के बाद भाजपा ने कहा

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध होने का आरोप लगाया और ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान सेना पर की गई उनकी टिप्पणी की भी आलोचना की।

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ‘फटकार’ राहुल गांधी के लिए एक गंभीर चेतावनी होनी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिसंबर 2022 में हुई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान सेना पर की गई टिप्पणी को लेकर लखनऊ की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अगर वह ‘सच्चे भारतीय’ हैं, तो ऐसा कुछ नहीं कहते।

उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधान ने कहा, ‘‘जो लोग संविधान को हाथ में लेकर देश भर में घूम रहे हैं, वे इसके सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता हैं।’’

उन्होंने संसद परिसर में ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘अगर कांग्रेस नेताओं और उनके पूरे कुनबे में संविधान के प्रति जरा भी सम्मान होता, तो उच्चतम न्यायालय की इस तरह की टिप्पणी की जरूरत नहीं पड़ती… वे संवैधानिक मूल्यों के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता हैं। अदालत को पूछना पड़ा: क्या आप भारतीय भी हैं?’’

प्रसाद ने राहुल से एक राष्ट्रीय नेता के रूप में अधिक जिम्मेदारी से पेश आने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘आप विपक्ष के नेता हैं। थोड़ी परिपक्वता दिखाएं।’’

पूर्व कानून मंत्री ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय द्वारा उन्हें यह कहने से बड़ा संदेश और क्या हो सकता है कि एक भारतीय को इस तरह नहीं बोलना चाहिए।’’

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प्रसाद ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर पर गांधी की टिप्पणी भी इससे अलग नहीं थी।

उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘सावरकर के बारे में उनकी टिप्पणी याद कीजिए? अदालत ने कहा था कि महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में ऐसी बातें नहीं कही जानी चाहिए। राफेल पर, उन्होंने कहा था ‘चौकीदार चोर है’ और उच्चतम न्यायालय ने अवमानना की पुष्टि की, और फिर उन्होंने माफी मांगी। अब यह तीन बार हो गया है। अगर वह अब भी नहीं सीखेंगे, तो हम क्या कर सकते हैं?’’

भाषा वैभव मनीषा

मनीषा

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