बेंगलुरु, पांच अगस्त (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश के बावजूद परिवहन हड़ताल करने के लिए मंगलवार को कड़ी फटकार लगाई और अवमानना कार्यवाही की चेतावनी दी, जिसके बाद केएसआरटीसी स्टाफ एंड वर्कर्स फेडरेशन ने आंदोलन 7 अगस्त तक स्थगित करने की घोषणा की, जब मामले की अगली सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति सी एम जोशी की खंडपीठ ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू होने और आंदोलन के साथ आगे नहीं बढ़ने के अदालत के निर्देश के बावजूद हड़ताल जारी रहने पर कड़ी नाराजगी जतायी।
पीठ ने चेतावनी दी कि हड़ताल जारी रखने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कर्मचारी संघ के नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
अदालत ने हड़ताल पर रोक लगाने संबंधी अपने पहले के अंतरिम आदेश को दो दिन के लिए बढ़ा दिया तथा कर्मचारी संघों को बुधवार को एक हलफनामा प्रस्तुत करके हड़ताल वापस लेने की पुष्टि करने का निर्देश दिया।
केएसआरटीसी स्टाफ एंड वर्कर्स फेडरेशन’ के अध्यक्ष एच वी अनंत सुब्बाराव ने बेंगलुरु में संवाददाताओं को बताया कि आंदोलन 7 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया है और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है।
सुनवायी के दौरान महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि हड़ताल के कारण जनता को काफी कठिनाई हुई है।
सुलह के प्रयासों के संबंध में पीठ द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में, सरकार के साथ पिछले दौर की बातचीत का विवरण प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने कहा कि यदि कोई समस्या है तो उसे सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि एस्मा लागू होने के बाद भी हड़ताल करना गैरकानूनी है। अदालत ने चारों राज्य परिवहन निगमों के कर्मचारी संघों को नोटिस भी जारी किया।
संयुक्त कार्रवाई समिति के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि बुधवार को हड़ताल जारी नहीं रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर हड़ताल फिर से शुरू होती है, तो सरकार एस्मा के तहत उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
भाषा अमित संतोष
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