नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) बिजली मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसने बिजली शुल्कों पर अनिश्चितता से जुड़ी चिंताओं के बीच नवीकरणीय ऊर्जा खरीद समझौतों के लिए एकसमान शुल्क व्यवस्था खत्म करने के साथ केंद्रीय मूल्य निर्धारण पूल को भी भंग कर दिया है।
इस कदम से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों और उपयोगकर्ताओं के बीच मूल्य निर्धारण में आसानी होने के साथ देश में नवीकरणीय क्षमता की स्थापना में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बिजली बिक्री समझौते (पीएसए) पर हस्ताक्षर की प्रतीक्षा कर रही पर्याप्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को देखते हुए और नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापना में तेजी लाने के लिए एकसमान नवीकरणीय ऊर्जा शुल्क (यूआरईटी) व्यवस्था से संबंधित आदेश को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
इस निर्णय के बाद सौर ऊर्जा केंद्रीय पूल और सौर-पवन हाइब्रिड केंद्रीय पूल भंग हो जाएंगे।
इससे पहले, बिजली मंत्रालय ने 15 फरवरी, 2024 से तीन वर्षों के लिए 14 फ़रवरी, 2027 तक यूआरईटी के कार्यान्वयन का आदेश दिया था।
यूआरईटी तंत्र और संबंधित केंद्रीय पूल को घटती बोली-आधारित कीमतों के संदर्भ में खरीदारों पर संभावित प्रभाव को दूर करने के लिए अधिसूचित किया गया था।
हालांकि, मंत्रालय ने अपने नवीनतम आदेश में कहा है कि नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियों (आरईएलए) और आरई डेवलपर्स ने तीन साल की अवधि में टैरिफ की अनिश्चितता के कारण यूआरईटी के तहत पीएसए (बिजली बिक्री समझौते) पर हस्ताक्षर करने में खरीदारों की अनिच्छा पर चिंता व्यक्त की है।
इन परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए आवश्यक अग्रिम बिजली खरीद समझौतों के अभाव में कई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं रुक गई हैं।
हालांकि, मंत्रालय ने कहा कि यूआरईटी के तहत अब तक मिली बोलियां और जारी किए गए आवंटन पत्र एकल आधार पर मान्य रहेंगे और बिजली खरीद समझौतों पर हस्ताक्षर करने के लिए उन पर विचार किया जा सकता है।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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