(अदिति खन्ना)
लंदन, छह अगस्त (भाषा) ब्रिटेन के ‘इंपीरियल वॉर म्यूजियम’ (आईडब्ल्यूएम) ने ‘‘भारत का युद्ध’’ नामक एक प्रमुख संग्रह परियोजना शुरू की है, जिसमें जनता को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों के अनुभवों से संबंधित कहानियों और यादगार वस्तुओं को साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
अगस्त 1945 में युद्ध की समाप्ति तक, भारतीय उपमहाद्वीप की सशस्त्र सेनाएं ब्रिटेन के बाद राष्ट्रमंडल देशों से ली गई दूसरी सबसे बड़ी लड़ाकू सेना थीं।
आईडब्ल्यूएम के अनुसार, 89000 दक्षिण एशियाई सैन्य कर्मियों ने ब्रिटेन के लगभग हर युद्ध मोर्चे पर लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। भारतीय सशस्त्र बलों के 28 कर्मियों को युद्ध में वीरता के लिए सर्वोच्च पुरस्कार ‘विक्टोरिया क्रॉस’ से सम्मानित किया गया।
आईडब्ल्यूएम में द्वितीय विश्व युद्ध और मध्य-20वीं सदी के वरिष्ठ संग्रहाध्यक्ष एड्रियन केरिसन ने कहा, ‘‘हालांकि, आईडब्ल्यूएम के पास द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय योगदान को दर्शाने वाले महत्वपूर्ण फिल्म और फोटोग्राफी संग्रह हैं, लेकिन ये अक्सर व्यक्तिगत स्तर पर युद्ध के अनुभवों को पूरी तरह से व्यक्त करने में असमर्थ होते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह संग्रहण परियोजना आईडब्ल्यूएम के लिए हमारे दर्शकों तक पहुंचने का एक अवसर है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये व्यक्तिगत कहानियां- जो भारत और ब्रिटेन में द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों की हमारी समझ के लिए महत्वपूर्ण हैं- आईडब्ल्यूएम के संग्रह में उचित रूप से प्रस्तुत की जाएं।’’
भाषा शफीक सुरेश
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