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Friday, August 29, 2025

भारत 2050 तक 25,000 अरब डॉलर की महाशक्ति बन जाएगा : गौतम अदाणी

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लखनऊ, सात अगस्त (भाषा ) अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने युवाओं से पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि ‘भविष्य कभी भी उनका नहीं होगा जो सुरक्षित खेलते हैं, बल्कि उनका होगा जो संभावनाओं को अधिकतम करते हैं।’

अरबपति उद्योगपति ने भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ में बृहस्पतिवार को छात्रों को संबोधित करते इस बात पर भी ज़ोर दिया कि 2050 तक भारत 25,000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था की ‘महाशक्ति’ बन जाएगा, जिसकी ओर ‘वैश्विक गुरुत्वाकर्षण केंद्र’ होगा।

कृत्रिम मेधा, एल्गोरिथम आधारित निर्णय लेने और वैश्विक अनिश्चितता के युग में शिक्षा की भूमिका पर बोलते हुए अदाणी ने कहा, ‘डीसी मॉडल, पोर्टर के पांच बल और एसडब्ल्यूओटी विश्लेषण जैसे ढांचों का अध्ययन करने का व्यवसाय की दुनिया में अपना स्थान है, लेकिन ये धारणाओं और पूर्वज्ञान पर आधारित होते हैं। ये आपको जोखिम को कम करना सिखाते हैं, लेकिन भविष्य को अधिकतम नहीं बनाना सिखाते, क्योंकि भविष्य कभी भी उनका नहीं होगा जो सुरक्षित खेलते हैं। यह उनका है जो संभावनाओं को अधिकतम करते हैं।’’

उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि भविष्य को आकार देने के लिए कल्पनाशीलता, जोखिम उठाने और दृढ़ विश्वास की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘संभावनाओं को अधिकतम करने का मतलब है बाज़ार के तैयार होने का संकेत देने से पहले ही क्षेत्र निर्माण में कदम रखना।’’

अदाणी समूह की मुंद्रा, धारावी और ऑस्ट्रेलिया जैसी कुछ चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने आगे कहा, ‘‘ये सिर्फ़ व्यावसायिक कार्य नहीं हैं, बल्कि कल्पनाशीलता के कार्य हैं, दुनिया को जैसी है वैसी स्वीकार न करने और उसे जैसी हो सकती है वैसी देखने का साहस।’’

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उन्होंने छात्रों से पाठ्य पुस्तकों से आगे सोचने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा ‘‘व्यावसायिक ढांचा आपको पहले से नापा हुआ, पहले से चिह्नित और सुरक्षित कैनवास प्रदान करते हैं। लेकिन भारत को खाली जगहों को भरने वाले और चित्रकारों की ज़रूरत नहीं है। उसे ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो कैनवास पर ही सवाल उठा सकें, जो ऐसे रंगों से चित्रकारी कर सकें जिनकी अभी तक कल्पना भी नहीं की गई है। और यही, अभी, आपका क्षण है क्योंकि भारत वह कैनवास है जो असाधारण युग में खड़ा है।’’

अदाणी ने कहा कि देश का परिवर्तन ‘चार अजेय शक्तियों’ – जनसांख्यिकी, मांग, डिजिटल बुनियादी ढांचा और घरेलू पूंजी द्वारा संचालित हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘पहली है जनसांख्यिकी – हम इस धरती पर सबसे युवा, सबसे महत्वाकांक्षी कामकाजी आबादी हैं। एक अरब सपने साकार होने के लिए तैयार हैं।’’

‘‘दूसरी है मांग। हम 2030 तक न केवल उपभोग करके, बल्कि दुनिया के लिए बाज़ार बनाकर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दौड़ में हैं।’’

उन्होंने तीसरी शक्ति के रूप में भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे पर प्रकाश डाला। ‘‘किसी भी देश ने वह नहीं बनाया है जो हमने बनाया है – जैसे आधार, यूपीआई और ओएनडीसी। ये केवल मंच नहीं हैं, बल्कि समावेश, नवाचार और पैमाने के लिए ‘लॉन्च पैड’ हैं।’’

‘‘और चौथी है घरेलू पूंजी। हमारे इतिहास में पहली बार भारतीय धन भारतीय विचारों का साहस, दृढ़ विश्वास और ऐसी तत्परता के साथ समर्थन कर रहा है जो हमने पहले कभी नहीं देखी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आप 5,000 या 10,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की कल्पना नहीं कर रहे होंगे, बल्कि आप एक ऐसे भारत की कल्पना कर रहे होंगे जो 2050 तक 25,000 अरब डॉलर की महाशक्ति बन जाएगा। वैश्विक गुरुत्वाकर्षण का केंद्र बदल जाएगा और यह आपकी और भारत की ओर होगा।’’

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छात्रों से भारत के सभ्यतागत मूल्यों में अपनी जड़ें जमाने का आग्रह करते हुए, अदाणी ने कहा, ‘‘आपने दुनिया भर में लिखी गई पुस्तकों का अध्ययन किया होगा, लेकिन याद रखें कि कुछ गहरा है और कुछ ऐसा है जो हर भारतीय जानता है जो कोई भी पाठ्य पुस्तक आपको कभी नहीं सिखा सकती।’’

भाषा किशोर जफर नोमान अजय

अजय

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