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Saturday, August 30, 2025

साल 2003 से साढ़े तीन लाख पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप प्रदान किया गया

Newsसाल 2003 से साढ़े तीन लाख पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप प्रदान किया गया

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) सरकार ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि 2003 से अब तक कुल 3.5 लाख पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप प्रदान किया जा चुका है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह भी बताया कि अब तक 92 पांडुलिपि संरक्षण केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से 42 वर्तमान में सक्रिय हैं।

उनसे पूछा गया था कि क्या सरकार सितंबर 2025 में स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन (11 सितंबर, 1893) के उपलक्ष्य में ज्ञान भारतम मिशन के तहत पहला अंतरराष्ट्रीय पांडुलिपि विरासत सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखती है।

शेखावत ने उत्तर में कहा, ‘‘हां। सरकार सितंबर 2025 में ‘पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत की ज्ञान विरासत को पुनः प्राप्त करना’ शीर्षक से पहला अंतरराष्ट्रीय पांडुलिपि विरासत सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह आयोजन 11 सितंबर, 1893 को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण की 132वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।’’

सरकार ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य दुनिया भर के विद्वानों, इतिहासकारों, पांडुलिपि विशेषज्ञों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को एक साथ लाकर भारत की विशाल और विविध पांडुलिपि विरासत का अन्वेषण, संरक्षण और संवर्धन करना है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने कहा कि 2003 से अब तक कुल 3.50 लाख पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

उन्होंने आगे कहा, ‘‘अब तक 92 पांडुलिपि संरक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 42 वर्तमान में सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त, 93 पांडुलिपि संसाधन केंद्र हैं, जिनमें से 37 वर्तमान में सक्रिय हैं।’’

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भाषा वैभव मनीषा

मनीषा

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