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Saturday, August 30, 2025

बिहार एसआईआर में एक भी विदेशी नागरिक नहीं मिला : भाकपा (माले) लिबरेशन

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नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने देश में घुसपैठियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए शनिवार को कहा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अवैध प्रवासियों का एक भी मामला सामने नहीं आया।

भट्टाचार्य ने बिहार में एसआईआर की कवायद के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से रविवार को शुरू की जाने वाली ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से एक दिन पहले दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपना सबसे लंबा भाषण दिया, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वतंत्रता दिवस का विषय अब विभाजन के मुद्दे तक सिमटकर रह गया है। ऐसा लग रहा है, मानो सरकार विभाजन के अधूरे एजेंडे को पूरा करने की कोशिश कर रही है।”

उन्होंने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर के पहले चरण के बाद जिन 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, निर्वाचन आयोग ने उनमें से किसी के भी विदेशी नागरिक होने का दावा नहीं किया है।

भट्टाचार्य ने कहा, “लेकिन मोदी जी एक बार फिर उस एजेंडे को वापस ले आए हैं, जो पूरी तरह से बेबुनियाद है और वह है अवैध आव्रजन, घुसपैठ का हौवा। साथ ही ऐसी चीजें जो वे (प्रवासी, घुसपैठिये) हमारी जनसांख्यिकी को बदलने के लिए कर रहे हैं, जिनमें नौकरियां छीनना, जमीन पर कब्जा करना, महिलाओं से शादी करना और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना शामिल है।”

उन्होंने कहा, “यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पूर्णतः प्रवासी-विरोधी एजेंडा है। इसी के कारण विभाजन हुआ, शायद वे एक और विभाजन चाहते हैं…।”

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भाकपा (माले) लिबरेशन नेता ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि सरकार भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या के बारे में कैसे किसी निष्कर्ष पर पहुंची, जबकि देश में 2011 से कोई जनगणना ही नहीं हुई है।

उन्होंने कहा, “इससे देश में दहशत का माहौल और असुरक्षा का भाव पैदा हो गया है। और जब आप इसे एसआईआर (पिछले दरवाजे से राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी एनआरसी), तथाकथित पुलिस सत्यापन अभियान, गृह मंत्रालय के परिपत्र के साथ जोड़कर देखते हैं, तो इससे हमारे सामने एक बड़े सामाजिक विभाजन और मताधिकार से वंचित लोगों की एक स्थायी श्रेणी तैयार होने का खतरा पैदा हो जाता है।”

भट्टाचार्य ने निर्वाचन आयोग के इस दावे पर भी सवाल उठाए कि राजनीतिक दलों ने एसआईआर के दौरान पेश किए जा रहे दावों पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। उन्होंने कहा कि पार्टियों या बूथ स्तर के एजेंटों या बीएलए द्वारा मतदाताओं की ओर से अपील दायर किए जाने के लिए कोई प्रावधान ही नहीं है।

भट्टाचार्य ने एसआईआर के तहत मृत घोषित किए गए पिंटू पासवान के मामले सहित अन्य मामलों का जिक्र करते हुए कहा, “अगर बीएलए से कोई शिकायत नहीं मिलने का दावा किया जाता है, तो यह पूरे एसआईआर अभियान का सबसे बड़ा झूठ होगा… उन्होंने सोचा कि वे शून्य शिकायत दिखाकर शून्य त्रुटि दिखा सकते हैं, लेकिन त्रुटियां पहले ही उजागर हो चुकी हैं।”

बिहार में रविवार को विपक्षी महागठबंधन की ओर से शुरू की जाने वाली ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बारे में बात करते हुए भट्टाचार्य ने कहा, “हम बिहार के नौ प्रमंडलों में से प्रत्येक में एक यात्रा निकालेंगे।”

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उन्होंने कहा, “हम जनसभाएं करेंगे, स्थानीय लोगों से मिलेंगे और नुक्कड़ सभाएं करेंगे। हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि एसआईआर प्रक्रिया में मतदाताओं को किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन में कहा था कि उनकी सरकार ने अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए एक उच्चस्तरीय जनसांख्यिकीय मिशन शुरू करने का फैसला लिया है।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप

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