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मचैल (किश्तवाड़), 16 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में शनिवार को सैकड़ों तीर्थयात्री मचैल माता मंदिर में एकत्र हुए और चशोती गांव में बादल फटने की घटना में जान गंवाने वालों तथा लापता लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रार्थना की।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के एक सुदूर पहाड़ी गांव में बृहस्पतिवार को बादल फटने से 60 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 100 से अधिक अन्य घायल हो गए।
किश्तवाड़ जिले के एक सुदूर पहाड़ी गांव चशोती में बृहस्पतिवार को बादल फटने से यह हादसा हुआ। मचैल माता मंदिर जाने वाले मार्ग में पड़ने वाले चशोती गांव में यह आपदा अपराह्न करीब 12:30 बजे हुई। जिस समय हादसा हुआ, उस समय मचैल माता मंदिर यात्रा के लिए वहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र थे। यह यात्रा 25 जुलाई को आरंभ हुई थी और पांच सितंबर को समाप्त होनी थी।
बड़ी संख्या में शनिवार को स्थानीय लोग और तीर्थयात्री मंदिर में एकत्र हुए और बादल फटने की इस दुखद घटना में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धालुओं ने लापता लोगों की सुरक्षा और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी प्रार्थना की।
मंदिर समिति के सदस्य सुरिंदर कुमार ने कहा, ‘‘ हमने बादल फटने की आपदा में जान गंवाने वाली दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष प्रार्थना की। यह पहली बार था कि मंदिर में ऐसी विशेष प्रार्थना आयोजित की गई, जो चशोती से कुछ किलोमीटर दूर है।’’
साढ़े नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर तक जाने के लिए श्रद्धालु चशोती गांव तक वाहन से पहुंच सकते हैं और उसके बाद उन्हें 8.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है। यात्रा शुक्रवार को दूसरे दिन भी निलंबित है।
चशोती गांव किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर है। यहां श्रद्धालुओं के लिए लगाया गया एक लंगर (सामुदायिक रसोईघर) इस घटना से सबसे अधिक प्रभावित हुआ। बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आ गई और दुकानों एवं एक सुरक्षा चौकी सहित कई इमारतें बह गईं। इस आपदा ने एक अस्थायी बाजार, लंगर स्थल और एक सुरक्षा चौकी को तहस-नहस कर दिया है।
भाषा रवि कांत प्रशांत
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