न्यूयॉर्क, 17 अगस्त (एपी) विशेष अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिखर वार्ता में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों को यूक्रेन को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी देने पर सहमति व्यक्त की है।
विटकॉफ ने कहा कि यह गारंटी नाटो की सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता के समान होगी और साढ़े तीन साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी भी संभावित समझौते का हिस्सा है।
विटकॉफ ने ‘सीएनएन’ के ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कार्यक्रम में कहा, ‘‘हम कुछ चीजों पर सहमति बनाने में सफल रहे : जैसे कि अमेरिका नाटो की तरह सुरक्षा प्रदान कर सकता है।’’
यूक्रेन उसे उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में शामिल किए जाने की मांग करता रहा है।
विशेष अमेरिकी दूत ने कहा कि उन्होंने पहली बार पुतिन को इस पर सहमत होते सुना है।
इस बीच, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ब्रसेल्स में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम यूक्रेन के लिए नाटो के अनुच्छेद 5 जैसी सुरक्षा गारंटी में योगदान करने की राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छा का स्वागत करते हैं। इच्छुक देशों का गठबंधन-जिसमें यूरोपीय संघ भी शामिल है- अपना योगदान देने के लिए तैयार है।’’
विटकॉफ ने अलास्का में शुक्रवार को हुई शिखर बैठक का पहला ब्योरा देते हुए कहा कि दोनों पक्ष “मजबूत सुरक्षा गारंटी पर सहमत हुए हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन के किसी भी अन्य क्षेत्र पर कब्जा न करने के लिए रूस कानूनी प्रतिबद्धता जताएगा।
जेलेंस्की ने हाल में अमेरिका को इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि वाशिंगटन यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी का समर्थन करने को तैयार है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी भी विवरण अस्पष्ट है।
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अगर युद्ध-विराम नहीं हुआ, तो इसके ‘‘नतीजे’’ भुगतने होंगे, जैसा कि ट्रंप ने पुतिन से मुलाकात से पहले चेतावनी दी थी। रूबियो ने यह भी कहा कि जब तक यूक्रेन बातचीत में शामिल नहीं होगा, तब तक युद्ध-विराम पर कोई समझौता नहीं हो पाएगा।
रूबियो ने ‘एबीसी’ के ‘दिस वीक’ कार्यक्रम में कहा, “अब, अगर कोई शांति समझौता नहीं होता, अगर इस युद्ध का अंत नहीं होता, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इसके नतीजे भुगतने होंगे।”
उन्होंने कहा, “लेकिन हम इससे बचने की कोशिश कर रहे हैं। बेहतर है शांति स्थापित हो, शत्रुता का अंत हो।”
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा, “हम शांति समझौते के कगार पर नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि वहां तक पहुंचना आसान नहीं होगा और इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।
एपी आशीष पारुल
पारुल