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नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) निर्वाचन आयोग के खिलाफ ‘वोट चोरी’ के आरोपों के लिए राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को कहा कि कांग्रेस नेता को मतदाता सूची में अनियमितताओं के अपने आरोपों पर सात दिन के भीतर शपथपत्र देना चाहिए, अन्यथा उनके ‘वोट चोरी’ के दावे ‘‘निराधार और अमान्य’’ माने जाएंगे।
गांधी द्वारा 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाने और कई विपक्षी नेताओं द्वारा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे को उठाने के बाद अपनी पहली प्रेस वार्ता में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि या तो गांधी माफी मांगें या चुनावी नियमों के तहत हस्ताक्षरित हलफनामे के साथ अपने दावों का समर्थन करें।
उन्होंने कहा, ‘‘हलफनामा दें या देश से माफी मांगें। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। अगर सात दिन के भीतर शपथपत्र नहीं दिया जाता है, तो दावे निराधार और अमान्य माने जाएंगे।’’
‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 31 जुलाई को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रस्तुति के माध्यम से 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया था कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से अधिक वोट ‘‘चोरी’’ हुए थे।
गांधी ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया था। कई राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने गांधी से उनके दावों पर शपथपत्र दाखिल करने को कहा था, लेकिन गांधी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि न तो आयोग और न ही मतदाता दोहरे मतदान तथा ‘‘वोट चोरी’’ के आरोपों से डरते हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए ‘‘चुनाव चोरी’’ करने की साजिश की जा रही है, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं होने देगा।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत से पहले आयोजित सभा में यह दावा भी किया कि अब सबको पता चल गया है कि पूरे देश में ‘‘वोट की चोरी’’ की जा रही है।
कुमार ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य मतदाता सूचियों में सभी त्रुटियों को दूर करना है और यह गंभीर चिंता का विषय है कि कुछ दल इसके बारे में गलत सूचना फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दल ‘‘आयोग के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं।’’
कुमार ने कहा, ‘‘यदि कोई यह सोचता है कि गलत तथ्यों के साथ प्रस्तुतीकरण देने से आयोग कार्रवाई करेगा, तो ऐसा नहीं है। निर्वाचन आयोग ऐसे गंभीर मामले में हलफनामे के बिना कार्रवाई नहीं कर सकता, क्योंकि यह कानून और संविधान के खिलाफ होगा।’’
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने रविवार को स्वीकार किया कि मतदाता सूचियों में विसंगतियां हो सकती हैं और कहा कि इसे ठीक करने का एकमात्र तरीका एसआईआर है।
हालांकि, उन्होंने तर्क दिया कि किसी व्यक्ति का कई मतदाता सूचियों में नाम होने का यह मतलब नहीं है कि उसने कई बार मतदान भी किया हो।
कुमार ने यह भी कहा कि आयोग पहले ही कई लोगों के एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या वाले तीन लाख से ज्यादा मामलों की पहचान कर उन्हें ठीक कर चुका है, लेकिन एक व्यक्ति के कई जगहों पर मतदाता के रूप में सूचीबद्ध होने के ‘डुप्लिकेट मतदाता’ मुद्दे को केवल एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।
कुमार ने कहा, ‘‘जमीनी स्तर पर, सभी मतदाता, राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्ष, बीएलओ पारदर्शिता से काम कर रहे हैं, सत्यापन कर रहे हैं और वीडियो गवाही दे रहे हैं। यह चिंताजनक बात है कि ये प्रयास उनके राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेताओं तक नहीं पहुंच रहे हैं, या वे भ्रम पैदा करने के लिए इसे अनदेखा कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि सभी हितधारक एसआईआर को सफल बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, वे कड़ी मेहनत कर रहे हैं।’’
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे एक सितंबर से पहले बिहार मसौदा मतदाता सूची में त्रुटियों को उजागर करें।
विपक्ष द्वारा बिहार में एसआईआर के समय पर सवाल उठाए जाने पर कुमार ने कहा कि यह एक मिथक है कि एसआईआर जल्दबाजी में किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक चुनाव से पहले मतदाता सूची को सही करना निर्वाचन आयोग का कानूनी कर्तव्य है।
कुमार ने कहा कि निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता तथा सत्तारूढ़ और विपक्षी दल, दोनों ही चुनाव प्राधिकार के लिए समान हैं।
कुमार ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद बिहार की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए नामों की सूची उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद जिलाधिकारियों की वेबसाइटों पर डाल दी गई है।
चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह निर्वाचन आयोग से कहा था कि वह मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों का विवरण प्रकाशित करे, साथ ही उन्हें शामिल न करने के कारण भी बताए, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
सीईसी ने कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देश के 56 घंटे के भीतर, जिन मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उन्हें जिलों की वेबसाइट पर डाल दिया गया।
कुमार की 85 मिनट की प्रेस वार्ता समाप्त होने के तुरंत बाद कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग पर उसकी “अक्षमता” और “स्पष्ट पक्षपातपूर्ण रवैये” को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग “पूरी तरह से बेनकाब” हो चुका है।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के इस दावे को भी हास्यास्पद बताया कि वह सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के बीच कोई अंतर नहीं करता।
कुमार ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं तथा बूथ स्तर के अधिकारी और एजेंट पारदर्शी तरीके से मिलकर काम कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता तथा सत्तारूढ़ और विपक्षी दल, दोनों ही चुनाव प्राधिकार के लिए समान हैं।
कुमार ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग बिना किसी की राजनीति की परवाह किए सभी वर्गों के मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह अडिग रहेगा।’’
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यह भी याद दिलाया कि उच्चतम न्यायालय ने 2019 के एक फैसले में ‘मशीन रीडएबल’ मतदाता सूचियों को साझा करने पर रोक लगा दी थी क्योंकि ऐसा करने से मतदाताओं की निजता का उल्लंघन होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें मशीन-रीडएबल मतदाता सूची और खोजे जा सकने वाले प्रारूप में मतदाता सूची के बीच अंतर समझना होगा। आप ईपीआईसी नंबर दर्ज करके निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध मतदाता सूची खोज सकते हैं। आप इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं।’’
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल 2024 के राज्य चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए आयोग पर महाराष्ट्र मतदाता सूचियों की ‘मशीन रीडएबल’ डिजिटल प्रति उपलब्ध कराने का दबाव बना रहे हैं।
भाषा शफीक प्रशांत
प्रशांत