जयपुर। रविवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में राजस्थान सरकार की कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधानसभा सत्र, विभिन्न बिल और नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कैबिनेट बैठक में उन बिलों पर भी विचार हुआ, जिन्हें प्रमुख समितियों को भेजा गया है। इसके बाद मंत्री परिषद की बैठक भी संपन्न हुई। बैठक के बाद डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, मंत्री जोगाराम पटेल और सुमित गोदारा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी मीडिया को दी।
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि सीवरेज और अपशिष्ट नीति 2016 में संशोधन किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के तहत 374 महाविद्यालयों में राजसेज के तहत 4700 पदों पर भर्ती पर भी चर्चा हुई। मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि धर्म परिवर्तन रोकने के लिए सरकार ने पिछली बार बिल पेश किया था। अब इसमें कुछ संशोधन किए जाने के बाद यह बिल फिर सदन में पेश किया जाएगा।
कई महत्वपूर्ण फैसले
भजनलाल सरकार की कैबिनेट ने रविवार को कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसके तहत राजस्थान सेवा नियमों में परिवर्तन किया गया है, जिससे कार्मिकों को पदोन्नति का लाभ मिलेगा। कैबिनेट ने सीवरेज और अपशिष्ट जल नीति 2016 में संशोधन किया है, जिससे सीवरेज जल का पुन: उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा नमामि गंगे नियम में भी बदलाव किया गया है। अब इस नीति के क्रियान्वयन के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी दिशा-निर्देश तय करेगी।
शिक्षा विभाग में 374 महाविद्यालयों में राजसेज के तहत भर्ती पर चर्चा हुई। साथ ही, धर्म परिवर्तन रोकने के लिए संशोधन के बाद सरकार फिर से बिल सदन में पेश करेगी। कैबिनेट ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के सेवा नियम बनाने की अनुमति भी दी। सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के लिए कई फैसले लिए गए हैं। इसके तहत अगले दिवाली तक राजस्थान में 2 लाख स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी, जिन पर 160 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे।
धर्म परिवर्तन रोकने के लिए नया बिल लाएगी
मंत्री जोगराम पटेल ने बताया कि राजस्थान सरकार धर्म परिवर्तन रोकने के लिए नया बिल सदन में पेश करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति अपने मूल धर्म में वापस आना चाहता है तो उस पर यह प्रावधान लागू नहीं होगा। बिल में धर्म परिवर्तन के उल्लंघनों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इसमें गलत सूचना देना, बलपूर्वक कार्य करना, धोखाधड़ी, जबरदस्ती प्रचार करना, प्रलोभन देना, विवाह का झांसा देकर धर्म परिवर्तन करना शामिल हैं।
इसके लिए कम से कम 7 वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना प्रस्तावित है। यदि इस प्रकार का अपराध नाबालिग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या दिव्यांग महिला के साथ किया जाता है, तो न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम 20 वर्ष की सजा और 10 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगेगा। सामूहिक धर्म परिवर्तन पर न्यूनतम 20 वर्ष और अधिकतम आजीवन कारावास के साथ 25 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है।
यह भी पढ़ें: SI भर्ती 2021 रद्द होने पर केंद्रीय मंत्री शेखावत का बड़ा बयान- कुछ लोगों की गलती से पूरी भर्ती रद्द करना सही नहीं