राजस्थान की 3858 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 14 अक्टूबर की मध्यरात्रि से समाप्त हो जाएगा। पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद इन पंचायतों की प्रशासनिक जिम्मेदारी अब सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों को सौंपी जाएगी। सरकार ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि जिन पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वहां संबंधित सरपंचों को ही अस्थायी प्रशासक बनाया जाएगा। वहीं, वार्ड पंचों और सरपंचों को स्थायी समितियों में जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि पंचायत स्तर पर कामकाज की निरंतरता बनी रहे।
ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि जैसे ही किसी पंचायत का कार्यकाल पूरा हो, वहां तुरंत प्रशासक की नियुक्ति की जाए। आदेशों के अनुसार, चुनाव कार्यक्रम घोषित होने तक पंचायतों का संचालन प्रशासक ही करेंगे। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में कई पंचायतों का कार्यकाल अक्टूबर से दिसंबर के बीच चरणबद्ध तरीके से पूरा होना है। ऐसे में सरकार ने प्रशासनिक तैयारियों को पहले से मजबूत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर विकास कार्य प्रभावित न हों।
कांग्रेस ने भजनलाल सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पंचायतों में चुनाव की बजाय प्रशासक नियुक्त करने को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सीधा निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार जमीनी हकीकत से डर रही है, इसलिए चुनाव कराने से बच रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि पंचायतों पर अघोषित रूप से नियंत्रण बनाए रखने के लिए प्रशासक लगाए जा रहे हैं। साथ ही, परिसीमन के नाम पर पंचायतों और शहरी वार्डों में मनमानी तोड़फोड़ की जा रही है, ताकि बाद में चुनाव में फायदा उठाया जा सके।
बीते दिनों हाईकोर्ट ने सुनाया था बड़ा फैसला
वहीं दूसरी ओर भजनलाल सरकार ‘एक देश, एक चुनाव’ के तहत आगे बढ़ने की तैयारी में है। सरकार के मंत्रियों का कहना है कि वह चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और परिसीमन का काम पूरा होते ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। पंचायत चुनावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। इसी बीच हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को जल्द से जल्द चुनाव कराने के आदेश दिए थे। फिलहाल 3858 ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने के बाद सियासत के और गरमाने के आसार हैं।
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