जैसलमेर। राजस्थान के जैसलमेर में मंगलवार को हुए भीषण बस अग्निकांड (Jaisalmer Bus Fire Tragedy) ने ना सिर्फ 20 जिंदगियां छीन लीं, बल्कि कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। इस दिल दहला देने वाली घटना में भारतीय सेना के जवान महेंद्र मेघवाल भी अपने पूरे परिवार के साथ इस दुनिया को अलविदा कह गए। 35 वर्षीय महेंद्र अपने जीवन की सबसे खास छुट्टियों — दिवाली — पर घर लौट रहे थे। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था।
अपनों की रक्षा का भी मौका नहीं मिला
महेंद्र मेघवाल सेना के आयुध डिपो में तैनात थे। इस बार दिवाली की छुट्टियों में वह अपनी पत्नी पार्वती, दो बेटियों और एक बेटे के साथ अपने गांव लवारन (डेचू के पास) लौट रहे थे। वे के.के. ट्रैवल्स की स्लीपर बस (RJ09PA8040) में सवार थे, जब यह बस आग की चपेट में आ गई। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि बस में सिर्फ एक ही निकासी द्वार था। आग फैलते ही अफरा-तफरी मच गई, लेकिन अधिकतर लोग समय रहते बाहर नहीं निकल पाए। महेंद्र और उनका पूरा परिवार इस बस में ही जलकर खाक हो गया।

DNA ही आखिरी पहचान…
इस हादसे की भयावहता इतनी थी कि शवों की पहचान कर पाना लगभग नामुमकिन हो गया है। अब महेंद्र मेघवाल और उनके परिजनों की पहचान DNA सैंपलिंग से की जा रही है। पार्वती के भाई ने जोधपुर मोर्चरी पहुंचकर सैंपल दे दिया है, वहीं महेंद्र की माताजी को भी DNA सैंपल के लिए लाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने यदि जरूरत पड़ी, तो मेडिकल टीम को उनके घर भेजने की तैयारी भी कर ली है।

एक परिवार, पांच जिंदगियां और एक अधूरी दिवाली
यह हादसा दिवाली से ठीक पहले हुआ। जब पूरा देश रौशनी के त्योहार की तैयारी में जुटा था, तब यह परिवार बस में बैठकर अपनों के बीच जाने को उत्सुक था। लेकिन, यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। यह महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम की विफलता का उदाहरण है। एक सिंगल डोर स्लीपर बस, सुरक्षा उपकरणों की कमी और लापरवाह संचालन ने 20 जिंदगियां लील लीं।
सरकारी प्रतिक्रियाएं और मुआवज़े की घोषणाएं
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने जोधपुर में घायलों से मुलाकात की और जांच के आदेश दिए। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता राशि की घोषणा की है। इधर, जोधपुर में सभी निजी बसों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी गई है ताकि आगे ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए।

