राजस्थान पुलिस ने ऑपरेशन शटरडाउन के तहत एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने पीएम किसान सम्मान निधि और पेंशन जैसी सरकारी योजनाओं का डेटा चोरी करके 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। पुलिस ने गिरोह के सरगना रामावतार सैनी समेत 30 सदस्यों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में 52.69 लाख रुपये नकद, 14 लग्जरी कारें, 35 लैपटॉप और कंप्यूटर, 70 मोबाइल और 11,000 संदिग्ध बैंक खाते बरामद हुए।
70 पुलिसकर्मियों ने की 70 घंटे मेहनत
यह बड़ी कार्रवाई 70 पुलिसकर्मियों की 70 घंटे की मेहनत के बाद राजस्थान और मध्यप्रदेश में छापों के जरिए सफल हुई। गिरोह के सदस्य आम मजदूर, गन्ने की चरखी लगाने वाले और केवल तीसरी-पांचवीं पास लोग थे, लेकिन तीन साल में ये फर्श से अर्श तक पहुँच गए। गिरोह के मास्टरमाइंड रामावतार सैनी (दौसा निवासी) तीसरी पास होने के बावजूद अब 1.5 करोड़ रुपये का मकान, दो लग्जरी कारें और कई भूखंडों के मालिक हैं। इसी तरह मनोहरथाना के राजू तंवर ने 1 करोड़ का मकान और 1.5 करोड़ की जमीन खरीदी, जबकि पहाड़पुरा के बिहारी रैदास ने मजदूरी करके लग्जरी गाड़ियां और संपत्ति जुटाई। ये लोग गरीब ग्रामीणों के आधार और बैंक खातों का दुरुपयोग कर फर्जी लाभार्थी बनाते थे।
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सरकारी धन की चोरी पर पुलिस का एक्शन
एसपी अमित कुमार ने इसे सरकारी धन की चोरी रोकने की एक ऐतिहासिक कार्रवाई बताया। गिरोह वसूली में 50 से 70 प्रतिशत रकम अपने पास रखता था। 8 सितंबर को मिली शिकायत के बाद साइबर थाना आशिक अली के मोबाइल से संदिग्ध लेन-देन का पता लगा सका। मास्टरमाइंड रामावतार पोर्टलों का गहरा ज्ञान रखता था और एजेंटों के जरिए राशि वसूलता था। विशेष SIT और SBI की चार सदस्यीय टीम इस धन-श्रृंखला का विश्लेषण कर रही है। पुलिस ने जागरूक नागरिक की सूचना की सराहना की। ऑपरेशन शटरडाउन के दौरान साइबर कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग की गई, जिसमें जियो टैगिंग और साइबर विशेषज्ञ शामिल थे। आगे और गिरफ्तारी की संभावना है।
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