SI भर्ती पेपर लीक: समय का पहिया फिर घुमा है और सुई गहलोत की तरफ…!

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पेपर लीक मामले में हेड कांस्टेबल राजकुमार यादव और उसके बेटे भरत यादव की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर आग कांग्रेस तक पहुंच गई है. सीधे तौर पर किसी कांग्रेसी नेता के शामिल होने की बात सामने नहीं आई है. लेकिन गहलोत के पीएसओ रह चुके यादव की गिरफ्तारी ने बीजेपी समर्थकों को हमला बोलने का मौका दे दिया है. एसओजी की इस कार्रवाई के बाद एसआई भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के निशाने पर भी अशोक गहलोत आ गए हैं.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का यह कहना कि किसी भी संवेदनशील पद पर व्यक्ति को रखने से पहले उसकी निष्ठा, आचरण और पृष्ठभूमि की पूरी तरह जांच होना अनिवार्य है, यह साफ तौर पर गहलोत के लिए निशाना है. वहीं, राजेंद्र राठौड़ ने भी गहलोत से पूछ ही लिया कि आखिरकार यह रिश्ता क्या कहलाता है?

कहानी यही खत्म नहीं हो रही. इस मामले में तार जुड़ते हुए एक और पूर्व कांग्रेसी नेता के करीबी तक पहुंच गए. आरोपी के बारे में बताया गया कि हेड कांस्टेबल राजकुमार पुलिस आयुक्तालय जयपुर में तैनात है. वह पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) रहने के अलावा राज्य में पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत मालवीया के पीएसओ भी रह चुके हैं. हालांकि मालवीया, फिलहाल बीजेपी में हैं. अब ऐसे में मालवीया का मुद्दा ना कांग्रेस उठाएगी और ना ही बीजेपी.

अब इस पूरी कहानी को सिलसिलेवार ढंग से समझिए…

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आरोपी राजकुमार यादव के तार कुंदन पंड्या से जुड़ रहे हैं. कुंदन पंड्या पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत मालवीया का निजी सचिव है. यादव मालवीया का PSO रह चुका है, जिसकी वजह से कुंदन पांड्या को भी जानता था. कुंदन कुमार पंड्या पर आरोप है कि उसने आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा से पेपर हासिल किया और अपने साथी रविन्द्र सैनी व राजकुमार यादव को दिया.

इस पूरी कहानी का सार यही है कि जिसे पेपर की गोपनीयता रखने की जिम्मेदारी (RPSC) मिली, उसके सदस्य ने तिजोरी खोली. उसकी तिजोरी से निकला ‘जिन्न’ उसके करीबियों तक पहुंचा. उन लोगों की अपने परिचितों के प्रति ‘दरियादिली’ के बाद पेपर का प्रसाद बंटता भी चला गया और बिकता भी. बरहाल, पेपर मार्केट में आया और दलालों के हाथों से होता हुआ फर्जी अभ्यर्थियों तक. इस कहानी को कोर्ट भी मानता है, SOG भी और तमाम जांच एजेंसियां. लेकिन नहीं मानती तो सरकार और वह यह भी नहीं मानती कि पेपर लीक के चलते योग अभ्यर्थियों के साथ धोखा हुआ और पेपर रद्द किया जाना चाहिए.

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