•रबी सीजन में रात के समय, राजस्थान डिस्कॉम्स के पास बिजली की अधिकता होती है और वे थर्मल प्लांटों का उत्पादन घटा देते हैं, अतः इस समय RTC बिजली की आवश्यकता नहीं होती। •दिन के समय, यदि किसी प्रकार की मांग उत्पन्न होती भी है तो वह सौर ऊर्जा के माध्यम से कहीं अधिक किफायती तरीके से पूरी की जा सकती है। •मानसून के मौसम में भी राजस्थान की मांग प्रोफ़ाइल ऐसी नहीं होती कि इस तरह की Dispatchable Renewable Energy उपयुक्त साबित हो। CEA (Central Electricity Authority) द्वारा राजस्थान के लिए वर्ष 2025-26 से 2035-36 तक की Resource Adequacy Plan जारी की गई है, जिसमें अप्रैल से जुलाई तक राजस्थान में अधिशेष बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई है जिसे अन्य राज्यों/उपयोगकर्ताओं को बैंकिंग/बाइलैटरल व्यवस्था या PUSHP पोर्टल के माध्यम से साझा किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठते है ? क्या राजस्थान डिस्कॉम्स की ज़रूरतों के बिना ली जा रही है 630 MW बिजली? क्यों सस्ती बिजली के ऑफर को ठुकराकर महंगे टैरिफ पर मंजूरी दी गई? क्या CEA की रिपोर्ट को दरकिनार किया गया है? महंगी दर पर 25 साल के लिए बिजली खरीद किसके लिए फायदेमंद है – जनता के लिए या कुछ ख़ास कंपनियों के लिए?•रबी सीजन में रात के समय, राजस्थान डिस्कॉम्स के पास बिजली की अधिकता होती है और वे थर्मल प्लांटों का उत्पादन घटा देते हैं, अतः इस समय RTC बिजली की आवश्यकता नहीं होती। •दिन के समय, यदि किसी प्रकार की मांग उत्पन्न होती भी है तो वह सौर ऊर्जा के माध्यम से कहीं अधिक किफायती तरीके से पूरी की जा सकती है। •मानसून के मौसम में भी राजस्थान की मांग प्रोफ़ाइल ऐसी नहीं होती कि इस तरह की Dispatchable Renewable Energy उपयुक्त साबित हो। CEA (Central Electricity Authority) द्वारा राजस्थान के लिए वर्ष 2025-26 से 2035-36 तक की Resource Adequacy Plan जारी की गई है, जिसमें अप्रैल से जुलाई तक राजस्थान में अधिशेष बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई है जिसे अन्य राज्यों/उपयोगकर्ताओं को बैंकिंग/बाइलैटरल व्यवस्था या PUSHP पोर्टल के माध्यम से साझा किया जा सकता है। ऐसे में सवाल उठते है ? क्या राजस्थान डिस्कॉम्स की ज़रूरतों के बिना ली जा रही है 630 MW बिजली? क्यों सस्ती बिजली के ऑफर को ठुकराकर महंगे टैरिफ पर मंजूरी दी गई? क्या CEA की रिपोर्ट को दरकिनार किया गया है? महंगी दर पर 25 साल के लिए बिजली खरीद किसके लिए फायदेमंद है – जनता के लिए या कुछ ख़ास कंपनियों के लिए?
