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Sunday, August 31, 2025

इलेक्ट्रिक इंजन के उत्पादन के लिए निविदा प्रक्रिया पारदर्शी, कांग्रेस का आरोप भ्रामक: रेल मंत्रालय

Newsइलेक्ट्रिक इंजन के उत्पादन के लिए निविदा प्रक्रिया पारदर्शी, कांग्रेस का आरोप भ्रामक: रेल मंत्रालय

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) रेल मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि 9,000 एचपी की इलेक्ट्रिक इंजन के निर्माण और रखरखाव के लिए निविदा को पारदर्शी तरीके से निष्पादित किया गया था।

मंत्रालय ने कांग्रेस के उन आरोपों को ‘‘भ्रामक’’ बताया, जिसमें कहा गया था कि अनुबंध देने में सीमेंस नामक कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

मंत्रालय का यह बयान कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे पर सोमवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के बाद आया है।

रेलवे बोर्ड के सूचना एवं प्रचार विभाग के कार्यकारी निदेशक दिलीप कुमार ने कहा, ‘‘संवाददाता सम्मेलन में भारतीय रेलवे और दाहोद में 9000 एचपी इलेक्ट्रिक इंजन के उत्पादन के खिलाफ विभिन्न भ्रामक आरोप लगाए गए।’’

निविदा प्रक्रिया के तथ्य प्रस्तुत करते हुए कुमार ने कहा कि एल्सटॉम और सीमेंस विश्व स्तर पर दो इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माता हैं जो 9000 एचपी (हॉर्स पावर) क्षमता के इलेक्ट्रिक इंजन को डिजाइन और निर्माण कर सकते हैं और दोनों ने निविदा में भाग लिया था।

कुमार ने कहा, ‘‘इस निविदा का मूल्यांकन तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा किया गया, जो भारतीय रेलवे की ओर से हमेशा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के अनुरूप था। तकनीकी मूल्यांकन में, एलस्टॉम और सीमेंस दोनों को समान स्थान दिया गया। वित्तीय बोली में, सबसे कम कीमत वाली बोली लगाने वाले को अनुबंध दिया गया।’’

कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में हितों के टकराव का सवाल उठाया और कहा कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पूर्व में सीमेंस इंडिया के उपाध्यक्ष रह चुके हैं।

हितों के टकराव की किसी भी आशंका को खारिज करते हुए, कुमार ने कहा कि पूरी निविदा प्रक्रिया अधिकारियों की टीम द्वारा निष्पादित की गई थी, जो नियमों के अनुसार ऐसे मामलों को संभालने के लिए तकनीकी और वित्तीय रूप से सक्षम हैं।

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कुमार ने कहा, ‘‘हितों के टकराव का कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि प्रक्रिया उन्हीं नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार अपनाई गई है, जिनका भारतीय रेलवे हमेशा से पालन करता रहा है। निविदा मूल्यांकन प्रक्रिया में रेल मंत्री की कोई भागीदारी नहीं है। इसके अलावा, सीमेंस और एल्सटॉम दोनों ही कई दशकों से भारतीय रेलवे के साथ काम कर रही हैं।’’

रेल मंत्रालय का कहना है कि वर्तमान विनिर्माण प्रक्रिया के अनुसार, दाहोद में इंजन के निर्माण में प्रयुक्त लगभग 89 प्रतिशत घटक भारत में ही बने हैं।

भाषा आशीष धीरज

धीरज

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