31 C
Jaipur
Saturday, August 30, 2025

छत्तीसगढ़ में अब तक तीन लाख से अधिक ‘नैनो डीएपी’ की बोतलों का भंडारण

Newsछत्तीसगढ़ में अब तक तीन लाख से अधिक ‘नैनो डीएपी’ की बोतलों का भंडारण

रायपुर, 24 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि राज्य में अब तक तीन लाख से अधिक ‘नैनो डीएपी’ की बोतलों का भंडारण किया जा चुका है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ मौसम में खेती-किसानी के लिए ठोस डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद की संभावित कमी की पूर्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा वैकल्पिक खादों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसी कड़ी में तरल ‘नैनो डीएपी’ एक प्रभावशाली विकल्प के रूप में उभर कर सामने आया है। इसके प्रयोग से किसानों को प्रति एकड़ धान की फसल में लगभग 75 रुपये का सीधा लाभ प्राप्त हो रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य शासन के निर्देश के अनुसार राज्य में इफको कंपनी द्वारा अब तक तीन लाख पांच हजार से अधिक ‘नैनो डीएपी’ की बोतलों का भंडारण सुनिश्चित किया गया है। इनमें से 82 हजार 470 बोतलें डबल ‘लॉक’ केंद्रों में, एक लाख 41 हजार 389 बोतलें प्राथमिक सहकारी कृषि साख समितियों में और 48 हजार बोतलें निजी क्षेत्र में भंडारित हैं।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में इफको कंपनी के पास 33 हजार से अधिक ‘नैनो डीएपी’ की बोतलें शेष उपलब्ध हैं। आधा लीटर की एक ‘नैनो डीएपी’ बोतल सहकारी समितियों में किसानों के लिए 600 रुपये की दर पर उपलब्ध कराई जा रही है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की एक एकड़ फसल के लिए आवश्यक 50 किलोग्राम ठोस डीएपी खाद के स्थान पर केवल 25 किलोग्राम ठोस डीएपी तथा एक लीटर ‘नैनो डीएपी’ की बोतल पर्याप्त होती है। एक बोरी (50 किलोग्राम) ठोस डीएपी की कीमत 1350 रुपये है जिसकी तुलना में नैनो डीएपी के प्रयोग से प्रति एकड़ 75 रुपये की बचत होती है। यह संयोजन पोषण की दृष्टि से एक बोरी ठोस डीएपी के समतुल्य होता है।

See also  Pocket HRMS unveils smHRty® 4.0 - 1st Multilingual smHRt® Chatbot for Digital Bharat that goes Beyond Answering Questions!

अधिकारियों ने बताया कि ‘नैनो डीएपी’ के उपयोग के लिए किसानों को जागरूक किया गया है। राज्य सरकार ने समय रहते ठोस डीएपी की कमी की आशंका को भांपते हुए ‘नैनो डीएपी’ के उपयोग को लेकर किसानों के बीच एक सघन जागरूकता अभियान चलाया गया है। कृषि विभाग के मैदानी अमले, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की सहायता से खेतों में ठोस डीएपी के साथ नैनो डीएपी के संयुक्त प्रयोग की विधियां किसानों को समझाई गई है।

उन्होंने बताया कि गांव-गांव जाकर आयोजित कृषि चौपालों और ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के माध्यम से किसानों को डेमो दिखाए गए और विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही ‘नैनो डीएपी’ से संबंधित पंपलेट, बैनर और पोस्टर सहकारी समितियों में प्रदर्शित किए गए हैं। कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारी लगातार खेतों का भ्रमण कर रहे हैं और किसानों को ‘नैनो डीएपी’ के प्रयोग और इसके लाभों की जानकारी दे रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप किसान पूरे विश्वास के साथ अपनी धान की फसल में ‘नैनो डीएपी’ का उपयोग कर रहे हैं।

भाषा संजीव जितेंद्र निहारिका

निहारिका

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles