नयी दिल्ली, एक अगस्त (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केरल की दो कैथोलिक नन की मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तारी को ‘‘राजनीतिक रंग’’ देने वालों पर शुक्रवार को निशाना साधते हुए कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है और कानून अपना काम करेगा।
नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस को सुखमन मंडावी नाम के एक व्यक्ति के साथ 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने स्थानीय बजरंग दल के एक पदाधिकारी की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया था।
बजरंग दल के कार्यकर्ता ने उनपर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की तीन युवतियों का जबरन धर्मांतरण कराने और उनकी तस्करी करने का आरोप लगाया था।
मुख्यमंत्री साय ने दावा किया कि लड़कियों को नर्सिंग प्रशिक्षण और उसके बाद नौकरी दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन नारायणपुर के एक व्यक्ति ने रेलवे स्टेशन पर उन्हें नन को सौंप दिया, जो उन्हें कथित तौर पर आगरा ले जा रही थीं।
साय ने कहा कि आरोप है कि यह ‘मानव तस्करी और प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन’ का प्रयास था। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘यह महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला है। जांच जारी है। मामला अदालत में विचाराधीन है और कानून अपना काम करेगा।’’
मुख्यमंत्री साय ने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ एक शांतिपूर्ण राज्य है जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग सद्भावना से रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बस्तर की हमारी बेटियों की सुरक्षा से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।’’
नन की गिरफ़्तारी का मुद्दा इस हफ़्ते की शुरुआत में विपक्षी दलों ने संसद में उठाया था। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को केरल की दो नन समेत तीन लोगों द्वारा दायर जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अमित पवनेश
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