(गुरदीप सिंह)
सिंगापुर, चार अगस्त (भाषा) सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन षणमुगरत्नम ने सिंगापुर में शिक्षा, महिला अधिकार, राजनीति, चिकित्सा, कानून, खेल और कला जैसे क्षेत्रों में योगदान देने वाली तमिल पीढ़ियों के योगदान को सराहा।
षणमुगरत्नम ने सिंगापुर के पाककला परिदृश्य में तमिल समुदाय के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला जैसे कि ‘मद्रास के मुस्लिम चूलिया’ समुदाय ने ‘मी गोरेंग’ (मसालेदार तले हुए नूडल्स) व्यंजन को कैसे लोकप्रिय बनाया।
‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ ने सोमवार को थर्मन के हवाले से कहा, ‘‘आज हम एसजी60 (स्वतंत्र सिंगापुर के 60 वर्ष) का जश्न मना रहे हैं। यह हमारे प्रत्येक समुदाय के योगदान की याद दिलाता है चाहे वे सबसे कठिन जीवन जीने वाले मजदूर हों या फिर सिविल सेवक, शिक्षाविद, पेशेवर और उद्यमी, सभी ने इस राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया है।’’
थर्मन ने शनिवार को ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ सिंगापुर तमिल्स’ (ईएसटी) के विमोचन के अवसर पर लगभग 600 अतिथियों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि सिंगापुर के तमिल समुदाय की कहानी कई मायनों में सिंगापुर की ही कहानी है जो इसके लचीलेपन, बहुसांस्कृतिक एकीकरण और साथ ही देश की स्वतंत्रता के 60 वर्षों में गहरे सामाजिक परिवर्तन की कहानी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सिंगापुर की आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में दक्षिण भारत से आए प्रवासी अपनी जातिगत परंपराओं और प्रथाओं को स्वाभाविक रूप से अपने साथ लाए थे।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली ने सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना योग्यता को बढ़ावा दिया, सार्वजनिक आवास सभी समुदायों के लोगों को एक साथ लाए और बढ़ती अर्थव्यवस्था ने सभी के लिए अवसर प्रदान किए।
उन्होंने कहा कि उन लोगों की मदद के लिए और अधिक काम किए जाने की आवश्यकता है, जिनके पूर्वज कुली और गिरमिटिया मजदूर के रूप में यहां आए थे।
भाषा सुरभि सिम्मी
सिम्मी