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Friday, August 29, 2025

बिना साक्ष्य के केवल आरोपी के आचरण के आधार पर दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहराया जा सकता: न्यायालय

Newsबिना साक्ष्य के केवल आरोपी के आचरण के आधार पर दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहराया जा सकता: न्यायालय

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने हत्या के मामले में एक व्यक्ति को बरी करते हुए मंगलवार को कहा कि ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में केवल आरोपी के आचरण के आधार पर दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जनवरी के आदेश के विरुद्ध आरोपी की अपील स्वीकार कर ली।

पीठ ने कहा, ‘संक्षेप में कहा जाए तो, ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में केवल आरोपी का आचरण ही दोषसिद्धि को उचित नहीं ठहरा सकता।’

निचली अदालत ने आरोपी को हत्या का दोषी ठहराया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने अपराध को गैर-इरादतन हत्या में बदल दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला कई आधार पर ‘गलत’ था।

पीठ ने कहा, ‘पहली गलती यह थी कि उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड पर मौजूद चिकित्सा साक्ष्य की विस्तार से जांच की और फिर अपीलकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी की विषय-वस्तु के साथ सीधे उसकी पुष्टि करने की कोशिश की।’

अदालत ने कहा कि विशेषज्ञ गवाह का साक्ष्य सलाहकारी प्रकृति का होता है और इसका इस्तेमाल केवल आरोपी को हत्या का दोषी ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता।

राज्य के वकील ने कहा कि अपीलकर्ता ने 2019 में पुलिस थाने जाकर मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

पीठ ने कहा कि किसी भी अन्य साक्ष्य की तरह, आरोपी का आचरण उन परिस्थितियों में से एक है, जिस पर अदालत रिकॉर्ड में मौजूद अन्य प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ विचार कर सकती है।

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पीठ ने कहा जब भी अदालत के सामने यह प्रश्न आए कि अपराध हत्या है या गैर इरादतन हत्या, तो इस समस्या पर तीन चरणों में विचार करना उचित होगा।

पीठ ने कहा कि प्रथम चरण में विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या आरोपी ने ऐसा कृत्य किया जिससे किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु हुई।

इसमें कहा गया है, ‘आरोपी के कृत्य और परिणामस्वरूप हुई मृत्यु के बीच का संबंध का प्रमाण दूसरे चरण की ओर ले जाता है, जिसमें यह विचार किया जाता है कि क्या आरोपी का कृत्य आईपीसी की धारा 299 में परिभाषित ‘गैर इरादतन हत्या’ के अंतर्गत आता है।’

पीठ ने कहा कि यदि इस प्रश्न का उत्तर प्रथम दृष्टया सकारात्मक पाया जाता है, तो अगले चरण में आईपीसी की धारा 300 के आवेदन पर विचार किया जाएगा, जो हत्या को परिभाषित करती है।

भाषा आशीष संतोष

संतोष

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