नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) को पूरी तरह सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसके न्यायिक एवं तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति कर दी है। इससे लंबे समय से लंबित जीएसटी विवादों के त्वरित समाधान का रास्ता साफ होगा।
मई, 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा को जीएसटीएटी की प्रधान पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। लेकिन इसके सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो पाई थी।
चार अगस्त, 2025 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मयंक कुमार जैन को न्यायिक सदस्य और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी ए वेणु प्रसाद एवं पूर्व आईआरएस (भारतीय राजस्व सेवा) अधिकारी अनिल कुमार गुप्ता को क्रमश: राज्य एवं केंद्र का तकनीकी सदस्य नियुक्त किया गया है।
जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरणों की 31 राज्य पीठों के गठन की अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। उन पीठों में 52 न्यायिक और 31 तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति की गई है।
हालांकि, अबतक केवल कुछ राज्यों—उत्तर प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, बिहार और महाराष्ट्र/ गोवा ने ही अपने तकनीकी सदस्यों के नामों की संस्तुति की है।
अपीलीय न्यायाधिकरण न होने से अभी तक जीएसटी विवादों का समाधान उच्च न्यायालयों या सर्वोच्च न्यायालय में होता रहा है। इससे समय और पूंजी दोनों का बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। उद्योग जगत लंबे समय से अपीलीय न्यायाधिकरण को कार्यान्वित करने की मांग कर रहा था।
वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने चार अगस्त को लोकसभा में पेश रिपोर्ट में भी इस विलंब पर चिंता जताते हुए कहा था कि अब इस प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। इस पर राजस्व विभाग ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में कहा था कि जीएसटीएटी की पीठों में मामलों की सुनवाई ‘बहुत जल्द’ शुरू होगी।
जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना का विचार मूलतः 2017 के केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम में था, लेकिन इसके स्वरूप को लेकर कानूनी चुनौतियों के चलते इसके गठन में देरी हुई।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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