भोपाल, छह अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश के गुना जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक अस्पताल ने फर्जीवाड़ा करके मुख्यमंत्री सहायता कोष से 40 से 50 लाख रुपये हासिल किए और जब जांच की गई तो पता चला कि अस्पताल पहले ही बंद हो चुका है।
कांग्रेस के जयवर्धन सिंह की ओर से विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने इस फर्जीवाड़े को स्वीकार किया है।
सिंह ने मकसूदनगढ़ में स्थित भोपाल सिटी हॉस्पिटल को मुख्यमंत्री सहायता कोष योजना के तहत राशि दिए जाने के बारे में सरकार से सवाल किया था, जिसके जवाब में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि राजेश शर्मा नामक एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल के जरिए इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।
उन्होंने कहा कि शर्मा ने आरोप लगाया था कि अस्पताल ने मुख्यमंत्री सहायता कोष योजना के अंतर्गत फर्जी आवेदन करके 40 से 50 लाख का फर्जीवाड़ा किया है।
पटेल ने कहा कि इस शिकायत के मद्देनजर गुना के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने चार सदस्यीय जांच दल गठित किया था, जिसने अस्पताल का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा, ‘‘निरीक्षण के दौरान पता चला कि अस्पताल बंद हो चुका है।’’
इस बीच, जयवर्धन सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री सहायता कोष में 10 महीने में करीब 50 लाख रुपयों का भ्रष्टाचार हुआ है और स्वास्थ्य मंत्री ने अपने जवाब में इसे स्वीकार भी किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों के नाम पर पैसा निकाला गया, उन्होंने खुद कहा है कि वे न तो कभी अस्पताल में भर्ती हुए और ना ही उन्हें कोई मदद मिली।’’
सिंह ने कहा कि इससे पहले भी उन्होंने अस्पताल को लेकर यह सवाल उठाया था और उसके अगले ही दिन अस्पताल के संचालक ने अस्पताल बंद करने का पत्र जारी कर दिया, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल को राशि जारी की गई।
उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक हम व्यापम घोटाले की बात करते थे, फर्जी डॉक्टरों की बात करते थे लेकिन यह उदाहरण है कि फर्जी डॉक्टरों के साथ-साथ भाजपा सरकार फर्जी अस्पताल भी बना रही है।’’
उन्होंने इस मामले में लिप्त सभी स्वास्थ्य अधिकारियों और फर्जी अस्पताल के संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब
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