नयी दिल्ली, 14 अगस्त (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रतिभूति बाजार में साइबर जुझारूपन और घटनाओं से निपटने की पेशेवरों की क्षमता को मजबूत बनाने के लिए लगातार क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाने जरूरी हैं।
पांडेय ने सेबी-विनियमित संस्थाओं के लिए ‘राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्थान’ (एनआईएसएम) में आयोजित एक साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम में कहा कि क्षमता निर्माण कोई एकबारगी प्रक्रिया या औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह सीखने, लगातार सुधार करने और बदलते खतरों के अनुरूप ढलने की सतत प्रक्रिया है।
उन्होंने आगाह किया कि छोटी-सी तकनीकी खामी के भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी एल्गो ट्रेडिंग व्यवस्था में छोटी गड़बड़ी भी होने से पल भर में बाजार में उथलपुथल मच सकती है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि 2012 में अमेरिका की नाइट कैपिटल कंपनी के नए सॉफ्टवेयर में पुराना कोड रह जाने से 45 मिनट में ही अरबों डॉलर के गलत लेनदेन हो गए थे जिससे कंपनी को 44 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ और बाद में उसका पतन हो गया।
सेबी प्रमुख ने कहा कि साइबर हमले अब अलग-थलग घटना नहीं रह गए हैं और अगले दशक में इनकी गिनती शीर्ष पांच वैश्विक खतरों के रूप में की गई है।
उन्होंने शेयर बाजार, समाशोधन निगम और डिपॉजिटरी जैसी ‘राष्ट्रीय महत्व की बुनियादी संरचनाओं’ की साइबर सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि इनका सुचारू संचालन पूंजी निर्माण, निवेशक भरोसे और आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
पांडेय ने कहा कि तेजी से बदलते साइबर सुरक्षा परिदृश्य में ‘रोकथाम इलाज से कहीं सस्ता’ है और प्रौद्योगिकी जितनी अहम है, उतना ही जरूरी मानवीय सतर्कता है।
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