(तस्वीर के साथ)
हैदराबाद, 15 अगस्त (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शुक्रवार को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तारीफ करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि संघ का महिमामंडन करना स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है।
ओवैसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि आरएसएस और उसके वैचारिक सहयोगियों ने “ब्रिटिश शासन के पैदल सैनिकों” के रूप में काम किया था।
उन्होंने दावा किया कि संघ और उसके सहयोगी कभी भी आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं हुए।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि संघ और उसके सहयोगियों ने कभी अंग्रेजों का उतना विरोध नहीं किया, जितनी उन्होंने महात्मा गांधी से नफरत की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमें एक बार फिर याद दिलाया कि “वास्तविक इतिहास को जानना और असल नायकों का सम्मान करना” क्यों जरूरी है।
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, “अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब कायरता को बहादुरी के सर्वोच्च स्वरूप के रूप में बेचा जाएगा। आरएसएस समावेशी राष्ट्रवाद के मूल्यों को खारिज करता है, जिसने हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया था।”
उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व की विचारधारा बहिष्कार में विश्वास करती है और हमारे संविधान के मूल्यों के विपरीत है।
ओवैसी ने कहा, “मोदी एक स्वयंसेवक के रूप में आरएसएस की प्रशंसा करने नागपुर जा सकते थे, उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले से ऐसा क्यों करना पड़ा?”
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में आरएसएस की स्थापना के 100 साल पूरे होने का जिक्र किया और इसे “दुनिया के सबसे बड़े एनजीओ” की “बहुत गौरवशाली और शानदार” यात्रा बताया। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पित सेवा के लिए संघ के सभी स्वयंसेवकों की सराहना की।
भाषा पारुल सुरेश
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