नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) सरकार ने शनिवार को विपक्षी कांग्रेस पार्टी पर सबसे बड़े जीएसटी सुधारों का श्रेय लेने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी उस समय सदन में मौजूद भी नहीं थी, जब ऐतिहासिक ‘एक राष्ट्र, एक कर’ कानून पारित हुआ था।
शीर्ष सरकारी सूत्रों ने साथ ही कहा कि इस संबंध में कांग्रेस के बयानों से पाखंड की बू आ रही है।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के इतिहास को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 2004 में जब कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आई थी, तब अर्थव्यवस्था ”पूरी तरह स्वस्थ” थी, लेकिन फिर भी वह राज्यों को जीएसटी के लिए एकजुट नहीं कर पाई, क्योंकि उनके नेताओं में ”बड़प्पन” का अभाव था।
सूत्र ने कहा, ”कांग्रेस पार्टी अब कर दरों और स्लैब में कटौती की हमारी गरीब समर्थक, मध्यम वर्ग समर्थक और एमएसएमई समर्थक योजना का श्रेय लेने के लिए बेताब है। कांग्रेस ऐसा ही करती है, जबकि उसका रवैया बाधा डालने वाला और आम आदमी के खिलाफ है।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यापक जीएसटी सुधारों की घोषणा के एक दिन बाद कांग्रेस ने शनिवार को व्यापक बहस के लिए ‘जीएसटी 2.0’ पर जल्द ही एक आधिकारिक चर्चा पत्र की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि वह पिछले ढाई साल से जीएसटी व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की मांग कर रही थी।
सूत्र ने कहा, ”अगर कांग्रेस अब हमें जीएसटी सुधारों पर उपदेश देना शुरू कर देती है, तो इससे केवल उसके पाखंड का ही पता चलेगा। जब भी हम कोई बुनियादी सुधार लाते हैं, कांग्रेस पार्टी उसमें बाधा डालना चाहती है।”
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस का जीएसटी लाने का कोई इरादा नहीं था और जब मोदी सरकार ने नेतृत्व क्षमता दिखाई और राज्यों को एकजुट किया, तो कांग्रेस ने इसे ‘गब्बर सिंह टैक्स’ कहा।
कांग्रेस पार्टी ने 30 जून और एक जुलाई, 2017 की मध्यरात्रि को संसद के केंद्रीय कक्ष में जीएसटी लागू होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। जीएसटी कानून पारित होने के दौरान कांग्रेस लोकसभा से बाहर चली गई थी।
सूत्र ने कहा, ”मुझे आश्चर्य है कि क्या कांग्रेस पार्टी को जीएसटी पर बात करने का नैतिक अधिकार है।”
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों के वित्त मंत्री जीएसटी परिषद का हिस्सा हैं और परिषद द्वारा लिए गए प्रत्येक निर्णय में उनकी भागीदारी होती है।
भाषा पाण्डेय
पाण्डेय