रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनियाइस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारोकैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकताएक पत्थर तो तबीअ’त से उछालो यारो-दुष्यंत कुमार

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