एफ़आईआर में जीआईएस लोकेशन क्यों ज़रूरी है: राजस्थान पुलिसिंग को 21वीं सदी में ले जाने का समय

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राजस्थान में हर बड़े हादसे, झगड़े, चोरी या सड़क दुर्घटना के बाद एक सवाल बार–बार उठता है क्या हमारी पुलिसिंग वाकई उतनी आधुनिक है, जितनी हो सकती है? जवाब असहज कर देने वाला है। टेक्नोलॉजी के दौर में भी हमारी एफ़आईआर व्यवस्था घटना स्थल की सही लोकेशन तक नहीं दर्ज करती। नतीजा यह होता है कि न अपराध का असली हॉटस्पॉट पता चलता है, न पुलिस की तैनाती वैज्ञानिक तरीके से हो पाती है। सोचिए, अगर हर एफ़आईआर में घटना का सटीक जियो-लोकेशन यानी लैटिट्यूड और लॉन्गिट्यूड अनिवार्य हो जाए तो क्या बदल सकता है? सबसे पहले, अपराध के असली पैटर्न सामने आएंगे। हम सिर्फ़ अनुमान या शिकायतकर्ता की याददाश्त पर निर्भर नहीं रहेंगे। चोरी, छेड़छाड़, दुर्घटना कौन सा अपराध किन इलाकों में बार-बार हो रहा है, इसका डिजिटल नक्शा बनेगा। पुलिस की तैनाती, पेट्रोलिंग और रोकथाम सब डेटाबेस से तय हो पाएँगे। दूसरी बात, जवाबदेही बढ़ेगी। SHO से लेकर जिला स्तर तक हर अधिकारी यह देख सकेगा कि किस थाने ने किन इलाकों में अपराध पर पकड़ बनाई और कहाँ कमी रह गई। ड्यूटी अब सिर्फ़ काग़ज़ी न रहकर ज़मीनी होगी।तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा। जब लोग देखेंगे कि पुलिस की गश्त और कार्रवाई किसी फोन कॉल या संपर्क पर नहीं, बल्कि वास्तविक डेटा पर आधारित है, तो पुलिसिंग की छवि बदल जाएगी। सुरक्षा का एहसास बढ़ेगा। सबसे अच्छी बात यह सुधार न खर्चीला है, न जटिल। हर पुलिसकर्मी के पास स्मार्टफ़ोन या टैबलेट पहले से मौजूद है। CCTNS में एक छोटा-सा अपडेट, और एफ़आईआर सिस्टम स्वतः लोकेशन-टैगिंग सक्षम कर सकता है। बस एक क्लिक, और घटनास्थल का पिन मैप पर दर्ज।राजस्थान अगर एक केन्द्रीयकृत क्राइम मैपिंग डैशबोर्ड विकसित कर ले, तो पूरे राज्य का अपराध-मानचित्र पुलिस मुख्यालय में रियल-टाइम दिख सकता है किस जिले में किस किस्म की घटनाएँ बढ़ रही हैं, कहाँ रोकथाम तेज़ करनी है, कहाँ संसाधन बढ़ाने हैं। हम अक्सर पुलिसिंग को बदलने की बात करते हैं, पर बदलाव वहीं से शुरू होता है जहाँ डेटा ईमानदार हो, साफ़ हो और वैज्ञानिक हो। एफ़आईआर में जीआईएस लोकेशन टैगिंग, एक छोटा-सा कदम राजस्थान पुलिस को पूरी तरह डेटा-ड्रिवन, आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बना सकता है।ज़रूरत है कि राज्य सरकार इस सरल लेकिन क्रांतिकारी सुधार को जल्द लागू करे क्योंकि सटीक जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है।

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