लेकिन आज उसी सरिस्का में टाइगर के लिए हम इंसानी दखल को बढ़ाना चाहते हैं, इसके नतीजे कितने गंभीर होंगे?
आज बाघों ने अपने ऐतिहासिक क्षेत्र का 95% खो दिया है. यानी वो महज 5% क्षेत्र में संघर्ष कर रहे हैं. भारत में दुनिया के लगभग 75% बाघ की आबादी निवास करती है. टाइगर्स के मामले में भारत के अलावा रूस, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड प्रमुख देश हैं.
आज भारत में कुल 58 टाइगर रिजर्व अधिसूचित हैं, जो देश के लगभग 2.5% भौगोलिक क्षेत्र को घेरते हैं. भारत में ही दुनिया के 70% से ज़्यादा जंगली बाघों का घर है. आज देश के 18 राज्यों के 58 अभयारण्यों में 3,682 बाघ हैं.
मई 2005 में एक ऐसा वाकया हुआ, जब दुनिया हैरान रह गई. तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नमो नारायण मीना ने भारतीय संसद को बताया था कि अरावली के मुकुट सरिस्का में अब कोई बाघ नहीं बचा है. 2003 और 2004 टाइगर की हत्याओं के लिए बदनाम रहा और हमने सरिस्का में इस प्रजाति को खो दिया. इसके बाद शुरू हुआ रणथंभौर से लाए गए बाघों का पुनर्वास. सरिस्का अभयारण्य के वन क्षेत्र की सीमा तथा सुरक्षा को बढ़ाया गया, जिसके कारण वर्तमान में यहां लगभग 50 बाघ आबाद हो चुके हैं.
लेकिन सरकार को शायद टाइगर की यह आबादी रास नहीं आ रही है, इसी के चलते सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमा पुनर्निर्धारण के नाम पर इंसानी दखल को बढ़ाने की तैयारी कर ली गई है. क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) क्षेत्र की सीमा को फिर से तय करने के सरकारी प्रस्ताव का वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने विरोध शुरू कर दिया है.
केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि सीटीएच के पुनर्सीमांकन का आधार वैज्ञानिक मूल्यांकन और बाघों के संरक्षण की आवश्यकताओं पर केंद्रित है, न की खनन को छूट देने के उद्देश्य से प्रेरित है. वह इस विरोध को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं.
अब आप पूरा मामला समझिए और खुद ही फैसला कीजिए कि इसका सीमा निर्धारण कितना सही है?
वर्तमान में सरिस्का का जंगल 1213 वर्ग किलोमीटर में फैला है. इसमें 886 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जंगल का कोर एरिया है. जबकि अन्य क्षेत्र बफर जोन में शामिल है.
1997 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरिस्का का सीमांकन निर्धारित किया गया था. 1997 में गजट नोटिफिकेशन के दौरान कई माइंस बंद कर दी गई थी. साल 2023 का मामला कोर्ट में जाने के बाद कोर एरिया का 1 किलोमीटर और बफर के 10 किलोमीटर में व्यावसायिक ओर खनन गतिविधि पर पूर्ण रोक लगा दी थी. इसके चलते सरिस्का टहला क्षेत्र की 57 खान बंद कर दी गई थी.
लेकिन अब टाइगर रिजर्व का एरिया अब 1873 वर्ग किलोमीटर का हो जाएगा. इसमें अलवर, जयपुर वन मंडल का जंगल शामिल किया जा रहा है. सरिस्का प्रशासन ने यह प्रस्ताव सरकार को भेजा है. जुलाई तक इस प्रस्ताव पर मुहर लगने की संभावना है.
सीटीएच का दायरा बदलने से क्या होगा?
सीटीएच का दायरा बदलने से टहला क्षेत्र की बंद करीब 50 से अधिक मार्बल की खाने शुरू हो जाएंगी. साथ ही होटल्स पर गिरी गाज भी खत्म हो सकती है. इस परिवर्तन से सरिस्का के लिए खतरा पैदा हो सकता है. क्योंकि इस वक्त 48 टाइगर हैं, उनका जीवन खतरे में है. टाइगर के उस क्षेत्र को चेंज करने की कोशिश की जा रही है, जिस क्षेत्र में टाइगर का पहले से ही आवास है.

