*नई शिक्षा नीति (NEP) में आदिवासियों के इतिहास को जगह नहीं!!!*

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बीजेपी राज में SCERT ने कालीबाई का इतिहास किताब से किया गायब

डूंगरपुर ज़िले के रास्तापाल गांव की 13 साल की आदिवासी समाज की छात्रा कालीबाई का इतिहास राजस्थान से मिटाने की साजिश हो रही है. उदयपुर स्थित राज्य शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने नई शिक्षा नीति के अनुसार पाठयपुस्तक तैयार की है. लेकिन कक्षा 5वीं की किताब से वीर कालीबाई कलासुआ की शहादत का पाठ हटा दिया गया है.

कालीबाई को सिर्फ आदिवासी समाज के प्रतीक के तौर पर नहीं, बल्कि शिक्षा के लिए लड़ने वाली क्रांतिकारी के तौर प्रन्यास किया जाता है. ब्रिटिश शासन के अंतिम वर्षों में, डूंगरपुर रियासत के महारावल लक्ष्मण सिंह और अंग्रेजी हुकूमत के आदेश पर आदिवासी बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का आदेश दिया गया. 19 जून 1947 को, राज्य की पुलिस ने स्कूल बंद कराने के लिए दबाव डाला और विरोध करने पर शिक्षक सेंगाभाई को एक ट्रक से बांधकर घसीटना शुरू कर दिया. तभी वहां मौजूद 13 साल की भील समाज की छात्रा कालीबाई ने हंसिया लेकर दौड़ी और अपने शिक्षक सेंगाभाई की रस्सी काट दी. शिक्षक की जान तो बच गई, लेकिन पुलिस ने कालीबाई पर गोलियां चला दीं. 20 जून 1947 को कालीबाई ने चोटों के कारण दम तोड़ दिया

लेकिन आज उसी वीरांगना कालीबाई कलासुआ की शहादत का पाठ को स्कूली शिक्षा की किताबों से हटाया दिया गया है. वो चैप्टर, जिसमें कालीबाई की शहादत का जिक्र कर बच्चों को भक्ति, साहस और दूसरों की सेवा के लिए प्रेरित किया गया था, उसका नामोनिशान मिटा दिया गया है.

13 अगस्त से उपलब्ध होंगी नई किताबें

जानकारी के मुताबिक, नई किताब का निर्माण NCERT की किताबों के आधार पर किया गया है. इसी के तहत पाठ्यक्रम समिति के निर्णयानुसार नया पाठ्यक्रम लागू किया गया है. अब विद्यार्थी 13 अगस्त से नई किताबों से पढ़ाई करेंगे. लेकिन उसमें कालीबाई का इतिहास नहीं होगा.

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