माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका में कार्बन रिमूवल के लिए बड़ा कॉरपोरेट निवेश करने जा रहा है. यह कोई आम डील नहीं, बल्कि विश्व की प्रमुख टेक कंपनी मानव अपशिष्ट, खाद और सीवेज खरीदने के लिए 1.7 बिलियन डॉलर यानी 14 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च करेगा. सीधे तौर पर, टेक कंपनी अब 14 हज़ार करोड़ रुपए खर्च कर इंसानी मल-मूत्र खरीदकर करेगा. सुनने में ये थोड़ा अजीबो-गरीब प्रोजेक्ट जरूर लग रहा है, लेकिन बिल गेट्स ने इसके लिए वॉल्टेड डीप से 12 साल का समझौता किया. यह प्रोजेक्ट 12 साल यानी 2038 तक के लिए होगा. इसके तहत 4.9 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड हटाने का समझौता किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तकनीक से मीथेन उत्सर्जन कम, जमीन-पानी प्रदूषण की रोकथाम और स्थानीय रोजगार बढ़ेंगे. क्या है वॉल्टेड डीप और यह कंपनी कैसे काम करती है? वॉल्टेड डीप प्रदूषण से निजात पाने के लिए काम कर रही है. यह तकनीक का उपयोग करके इसे स्थायी रूप से हटाने के लिए पृथ्वी में बहुत गहराई तक इंजेक्ट करते हैं, ताकि स्थायी रूप से कार्बन लॉक हो जाे. इससे वातावरण से कार्बन हटाने के साथ ही मीथेन का उत्सर्जन भी कम होता है. माइक्रोसॉफ्ट ने डील के बारे में दी जानकारी माइक्रोसॉफ्ट का कहना है, “वॉल्टेड डीप कार्बन रिमूवल के लिए सुरक्षित, भरोसेमंद व स्केलेबल तकनीक प्रदान करता है, जिससे न केवल जलवायु को तुरंत लाभ मिलता है बल्कि लोकल इकोनॉमी में भी रोज़गार सृजित होता है.” यह डील दोनों कंपनियों के लिए वेस्ट मैनेजमेंट और जलवायु परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वॉल्टेड डीप अपना मॉडल अमेरिका भर में विस्तार कर सकेगा.

