विश्व विख्यातसांभर झील में प्रवासी पक्षियों की मृत्यु होना झील के संरक्षण को लेकर किए जा रहे तमाम सरकारी दावों को फेल साबित करते है | 2019 में यहां देश की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी हुई और अब फिर सांभर झील में एक बार फिर प्रवासी पक्षियों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया है। हर साल सर्दियों के मौसम में देश-विदेश से हजारों प्रवासी पक्षी इस झील में आते हैं और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इस बार भी फ्लेमिंगो, पेलिकन, पिंटेल और एवोसेट जैसी प्रजातियाँ यहां पहुंची लेकिन अचानक बड़ी संख्या में इनकी मौत से झील का पर्यावरणीय संतुलन और संरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं । प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि जल में प्रदूषण, रासायनिक असंतुलन या किसी विषाक्त संक्रमण के कारण यह घटना हुई हो सकती है मगर राजनेताओं के संरक्षण में झील क्षेत्र में अवैध नमक उत्पादन, औद्योगिक अपशिष्ट और प्लास्टिक कचरे का फैलाव भी लगातार बढ़ना पक्षियों की मौत का प्रमुख कारण है जिससे न केवल पक्षियों बल्कि झील की जैव विविधता पर भी बुरा असर पड़ रहा है | वर्ष 2019 में 20,000 से अधिक प्रवासी पक्षियों की मौत यहीं पर हुई और उस घटना के बाद झील संरक्षण और निगरानी के कई दावे किए गए थे, लेकिन मौजूदा हालात यह दिखा रहे हैं कि वे दावे अब भी अधूरे हैं।


