सुनों छात्रों, विदेश में पढ़ने का सपना ना देखें…क्योंकि राजस्थान सरकार ऐसा नहीं चाहती है!

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– दो बातों से साफ है कि वर्तमान भाजपा सरकार नहीं चाहती है कि कम या मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे विदेश में पढ़ाई करे – 1.देश के संस्थानों के लिए पिछले साल 143 सीटें खाली थी जिसके बाद भी सरकार ने इस बार देश के संस्थानों के लिए सीटें 200 से बढ़ाकर 350 कर दी. 2. वहीं E-2 कैटेगरी (सालाना आय ₹8 लाख से ₹25 लाख) वाले अब देश के संस्थानों में भी अप्लाई कर सकते हैं…इससे पहले इस कैटेगरी वाले केवल विदेश के लिए ही पात्र थे. राजस्थान के छात्रों के लिए देश-विदेश की यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के सपने को कैसे किश्तों में तोड़ा गया है इसका साक्षात उदाहरण ‘स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप योजना’ है जिसे पहले राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस कहा जाता था. ऐसे में खुद स्वामी विवेकानंद अगर आज होते तो क्या सोचते, सोचिए जरा? अब सरकार ने स्कॉलरशिप-2025 के लिए आवेदन मांगे गए हैं लेकिन योजना में कई बदलाव किए गए हैं. अब स्कॉलरशिप में यूनिवर्सिटी की संख्या भी 150 से कम करके 50 कर दी गई है. कई महीनों से छात्र संबंधित विभाग के चक्कर लगा रहे थे कि नोटिफिकेशन जारी हो लेकिन हुआ तो ये जिसका उनको अंदाजा तक नहीं था. इस बार कुल 500 सीटों पर आवेदन मांगे गए हैं जिनमें से 150 सीटें विदेश के संस्थानों के लिए और 350 सीटें भारत के संस्थानों के लिए हैं. इससे पहले सरकार ने विदेशी संस्थानों के लिए 300 सीट की थी और देश के संस्थानों के लिए 200 सीटें रखी थीं. वहीं 2024-25 की बात करें तो कुल 500 स्कॉलरशिप दी गई थी जहां 365 छात्रों के चयन में से 308 विदेश और 57 देश में पढ़ाई के लिए गए थे और 143 सीटें देश में खाली थीं जिन्हें दोबारा खोलने की अनुमति दी गई. अब देश वाली सीटें खाली क्यों रही इसकी वजह है लेटलतीफी, संस्थानों में एडमिशन का समय आ गया इधर नोटिफिकेशन ही जारी नहीं हुआ. कितने ही छात्र हैं जिनका साल तक खराब हो गया. जिन देश की सीटों में 143 खाली थी उसी सेक्शन में सरकार ने अब इस बार 350 सीटें रखी है और विदेश वाली सीधी आधी कर दी गई है. वहीं इस बार की गाइडलाइन में बताया गया है कि अब E-2 कैटेगरी (वार्षिक आय ₹8 लाख से ₹25 लाख) वाले देश के संस्थानों में भी अप्लाई कर सकते हैं. इससे पहले इस कैटेगरी वाले केवल विदेश के लिए ही पात्र थे. डिप्टी सीएम बैरवा का विधानसभा में दिया एक भाषण है जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार विकसित राजस्थान की दिशा में काम कर रही है जिसमें उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी…लेकिन दूसरी ओर सरकार ने उच्च शिक्षा लेने जाने वाले बच्चों की सीटों में हर साल कटौती की है. 25 लाख से ऊपर वालों पर चुप्पी! इस साल अप्रैल में सिरोही की 20 वर्षीय छात्रा मनजीत देवड़ा ने हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी जिस पप कोर्ट ने कहा था कि इस योजना का लाभ सम्पन्न विद्यार्थी ले रहे हैं और गरीब प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सहयोग देने का मूल उद्देश्य गौण हो गया है. इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने कहा था कि करदाताओं की गाढ़ी कमाई लुटाने के इस मामले पर कोर्ट आंख नहीं मूंद सकता और सरकार से यह भी पूछा कि क्यों न इस योजना और उसके दुरुपयोग पर रोक लगाने का आदेश दिया जाए? कोर्ट ने 25 लाख रुपए से अधिक आय वालों को योजना का लाभ देने पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से लाभार्थियों का ब्यौरा मांगा था. हालांकि बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने एकलपीठ के 29 अप्रैल को दिए इस आदेश पर खंडपीठ ने रोक लगा दी थी जिसके तहत एकलपीठ ने स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप स्कीम के तहत 25 लाख रुपए सालाना आय वाले परिवार के अभ्यर्थी को ई3 वर्ग में दी जा ही छात्रवृत्ति पर रोक लगाई थी. वहीं अब वर्तमान नोटिफिकेशन में भी ई-3 कैटेगरी में सालाना आय 25 लाख या उससे ऊपर का प्रावधान रखा गया है और इसमें सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया है.

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