अमेरिका के टैरिफ वॉर, चीन की बढ़ती ताकत के बीच एक यह भी सवाल अब वैश्विक समुदाय में उठ रहा है कि भारत किस प्रकार की महान शक्ति बनेगा?

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सवाल यह भी कि 4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की इकोनॉमी, तेज़ी से बढ़ती रक्षा क्षमता और ‘ग्लोबल साउथ’ के कई देशों पर प्रभाव वाले भारत की अगली रणनीति क्या होगी?

अनुमान है कि 2040 तक भारत की जीडीपी 10 ट्रिलियन डॉलर तक हो जाएगी, जो प्रगतिशील परिवर्तन की ओर इशारा करता है. हालांकि चीन के मामले में भारत के लिए चुनौतियां बहुत हैं सीमा-विवाद, अस्थिर व्यापार घाटा, भारतीय उपमहाद्वीप और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, पाकिस्तान के लिए व्यापक चीनी सैन्य और राजनयिक समर्थन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित बहुपक्षीय संस्थानों में चीन का कड़ा विरोध

वहीं, टैरिफ वॉर के लिहाज से बात करें तो रूस के अलावा, भारत के अन्य निकटतम वैश्विक साझेदार, ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ सहित सभी पारंपरिक अमेरिकी सहयोगी हैं. अब चिंता नई दिल्ली में संशय की नहीं, बल्कि वाशिंगटन में संशय की है.

चीन के साथ भारत संबंध रखते हुए सतर्क भी है, जो तनाव कम करने और प्रतिरोध दोनों पर आधारित है यानी एक ऐसा फॉर्मूला, जो संघर्ष को आमंत्रित किए बिना प्रतिस्पर्धा को प्रबंधित करने का प्रयास करता है. QUAD जैसा सुरक्षा गठबंधन, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं.

लेकिन इसे Isolation में नहीं देखा जा सकता है, पूरी दुनिया में महाशक्तियों के कम होते असर में भी भारत के नए समीकरण को समझना होगा. अमेरिका यूरोप में अपनी सुरक्षा गारंटियों, दक्षिण कोरिया में सैनिकों की संख्या, जापान को रक्षा योगदान और ऑस्ट्रेलिया को पनडुब्बी टेक्नोलॉजी ट्रांसफऱ की शर्तों पर पुनर्विचार कर रहा है. दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा उपसचिव एल्ब्रिज कोल्बी ने पिछले सितंबर में लिखा था- भारत पुराने अर्थों में एक सहयोगी है, जिसे एक स्वतंत्र और स्वायत्त साझेदार माना जाता है. यानी एशिया या मध्य पूर्व के कई अन्य साझेदारों के विपरीत, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से सहायता, अड्डे या सैनिक नहीं चाहता है.

जब दुनिया संकट से जूझ रही है तो भारत के सामने कई अवसर हैं

यूरोप में रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि तो हुई है बावजूद इसके अधिकांश एडवांस इकोनॉमी वाले देश अर्थव्यवस्थाएं बढ़ती उम्र और घटती आबादी, इमिग्रशेन पॉलिसी पर विवाद, वेलफेयर मॉडल यानी कल्याणकारी प्रणालियों पर दबाव, धीमे नवाचार और अमेरिका पर सैन्य निर्भरता से जूझ रहे हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका के अलावा, जी-7 के छह अन्य सदस्यों (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम) की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 1991 के बाद से 42 प्रतिशत से घटकर महज 18 प्रतिशत रह गई है.

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