जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में करोड़ों की लागत से निर्माणाधीन ट्रॉमा ब्लॉक और क्रिटिकल केयर ब्लॉक (CCB) न केवल डिज़ाइन और निर्माण से जुड़ी गंभीर व्यवहारिक कमियों से जूझ रहा है, बल्कि अब यह विद्युत की हाई टेंशन लाइन के बेहद निकट होने के कारण और अधिक चिंताओं का विषय बन गया है।इस परियोजना में न मेडिकल और सर्जिकल स्टोर के लिए समुचित स्थान तय किया गया है, न ही ब्लड बैंक की व्यवस्था है और न ही आपदा प्रबंधन (डिज़ास्टर एरिया) के लिए पृथक स्थान निर्धारित किया गया है। इन कमियों के चलते यह निर्माण कार्य पहले ही विशेषज्ञों और चिकित्सा कर्मियों के बीच आलोचना का विषय बना हुआ है।
चिंता की बात यह है कि निर्माणाधीन ट्रॉमा ब्लॉक के बिल्कुल पास से विद्युत की हाई टेंशन लाइन गुजर रही है, जिससे न केवल चिकित्सा उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, बल्कि निर्माण कार्य के दौरान श्रमिकों और अन्य लोगों की जान को भी गंभीर खतरा बना रहता है।ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि इतने संवेदनशील संस्थान के निर्माण में ये बुनियादी बातें कैसे नजरअंदाज की गईं? क्या नियोजन से लेकर निर्माण तक जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया? यह लापरवाही अब नीयत पर भी सवाल खड़े कर रही है।

